Thursday, March 10, 2011

कुछ नेताओं के लिए धंधा बन गई है राजनीति - सोमनाथ चटर्जी

पश्चिम बंगाल में रिकॉर्ड वर्षों तक मुख्यमंत्री रहे माकपा के वरिष्ठ नेता दिवंगत ज्योति बसु को अपना राजनीतिक गुरू मानने वाले लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों से काफी चिंतित हैं। उनका कहना है कि आजकल सत्ता में बने रहने और कुर्सी से चिपके रहने के लिए नेता हर वह हथकंड़ा अपना रहे हैं, जो उनके (नेताओं) के लिए फायदेमंद है। आजकल नेता देश नहीं, खुद के बारे में सोचने लगे हैं। कभी जनता सेवा, समाज सेवा और देश सेवा के लिए राजनीति में आने वाले लोग अब निज व परिवार सेवा को महत्व देने लगे हैं। यहीं कारण है कि जनता की नजर में आज नेताओं की वह इज्जत नहीं रह गई है, जो दस-बीस साल पहले होती थी या होनी चाहिए थी। ३० साल से ज्यादा समय तक सांसद और पांच साल तक लोकसभा अध्यक्ष रहे सोमनाथ चटर्जी से शुक्रवार के लिए शंकर जालान ने कोलकाता स्थित उनके निवास पर लंबी बातचीत की। पेश है बातचीत के प्रमुख अंश।० राजनीति में ईमानदारी कितनी जरूरी है?-ईमानदारी राजनीति ही क्यूं, हर क्षेत्र, हर काम और हर व्यवसाय में जरूरी है। हां इतना अवश्य कहूंगा कि बीते कुछ सालों के दौरान कई राजनेताओं ने ईमानदारी ताक पर रख दी है। आजकल राजनेता प्रतिष्ठा को नहीं, पैसे को महत्व देने लगे हैं। दुखद यह है कि अन्य क्षेत्र के लोगों की तुलना में नेताओं को ज्यादा ईमानदर होना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। आज कुछ नेताओं को लिए राजनीति धंधा बन गई है।० पहले लोग राजनीति में देश सेवा की भावना से आते थे, लेकिन अब पैसा कमाने के लिए ऐसा क्या हो रहा है?-भौतिकवादी सुविधा हासिल करने और रातों-रात अमीर बनने की लालशा इसका मुख्य कारण है। हर नेता यह सोचना लगा है कि जीत मिली है। जनता ने जीताकर विधानसभा या लोकसभा भवन भेज दिया है। जितना कमा सको कमा लो, जितना लूट सको लूट लो। क्या मालूम भविष्य में फिर मौका मिले या न मिले। ज्यादातर नेता चुनाव जीतने के बाद जनता से किए गए वायदे को पूरा करने की बजाए अपना घर भरने में लग जाते हैं।० आखिर इस बदलाव का कारण क्या है?-राजनेताओं के लिए कोई मानदंड नहीं है। कोई भी अपराधी चुनाव लड़ व जीत सकता है। यह स्वस्थ लोकतंत्र के लिए घातक है। मेरा मानना है कि जब तक राजनेताओं के लिए न्यूनतम मानदंड नहीं तय होगा, तब तक इस पर अंकुश लगाना संभव नहीं है। ० भ्रष्टाचार मुक्त राजनीति कैसे संभव है?-जनता के जरिए। भ्रष्टाचार पर रोक कोई कानून, कोई व्यवस्था या कोई नेता फिर कोई पार्टी तब तक नहीं लगा सकती जब तक जनता जागरूक नहीं होगी। जनता को अपना वोट डालने से पहले सौ बार सोचना चाहिए कि वह किसे वोट दे। कौन सा उम्मीदवार अन्य उम्मीदवारों की तुलना में नेक और ईमानदार है। जनता अगर ऐसा करने लगेगी और अपराधी व अल्प शिक्षित उम्मीदवार को वोट देने से पहरेज करेगी। तो देर-सबेर राजनीतिक पार्टियां भी अपराधी व कम पढ़े-लिखे लोगों को चुनावी टिकट देने से कतराने लगेगी। ० आपकी नजर में फिलहाल कौन-कौन नेता ईमानदार है?-हंसते हुए, यह क्या सवाल पूछ लिया आपने। मोटे तौर पर कहे तो जो पकड़ा गया वह चोर व बईमान बाकी सब ईमानदार।० दिवंगत हो चुके नेताओं में आप किसे ईमानदार मानते हैं?-कई नेता थे, जिनको लोग ईमानदार, साफ-सुथरी छवि वाले, समाज सुधारक, लोकहितकारी के रूप में याद करने हैं। मेरी नजर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, समाजवादी नेता जयप्रकाश व विनोवा भावे और माकपा के वरिष्ठ नेता ज्योति बसु है। ० आपको लोग सच्चे और ईमानदार नेता के रूप में जानते हैं? इस पर आप की क्या प्रतिक्रिया है?-देखिए, मेरा राजनीति में आना एक संयोग था। बचपन से मेरी राजनीति में कोई रूचि नहीं थी। मेरी वकालत अच्छी-खासी चल रही थी। मुझे खेल से लगाव था। मुझे राजनीति में मेरी इच्छा के विपरीत ज्योति बसु ने लाया या यूं कहे कि जबरदस्ती लाया तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। ४२ साल की उम्र में १९७१ में पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ा और जीता। इससे पहले मैंने कभी छात्र या युवा राजनीति में हिसा नहीं लिया था। दूसरे शब्दों में कहे तो जीवन के ४२ बसंत देखने के बाद राजनीति में आया और सीधा संसद पहुंचा। जीवन का काफी अनुभव हो चुका था। ज्योति बसु ने भी यही बताया और सिखाया था कि ईमानदारी के मार्फत ही राजनीति के मैदान पर अधिक समय तक टीका जा सकता है। मैं ज्योति बसु को अपना राजनीतिक गुरू मानता हूं और उनके इस कथन को सदैव याद रखता हूं कि अगर व्यक्ति ईमानदार हो तो समाज सेवा व देश सेवा के लिए राजनीति से बेहतर कोई मंच नहीं है। ० राजनीति में ईमानदारी की आप को क्या-क्या कीमत चुकानी पड़ी है?-विशेष कुछ नहीं। जरा-बहुत चुकानी भी पड़ी है तो वह इतनी उल्लेखनीय नहीं है कि उसका जिक्र किया जाए। ३५-४० साल के राजनीतिक जीवन में कई उतार-चढ़ाव आए हैं। मेरी नजर में चढ़ाव को उपलब्धि माना जा सकता है, लेकिन ढलान यानी उतार की कीमत चुकाना नहीं।० वर्तमान व्यवस्था में ईमानदार नेता होना क्या अयोग्यता का परिचायक नहीं है?-यह प्रश्न ही दुखद है। ज्यादातर नेताओं ने ऐसा काम किया है कि लोगों का नेताओं से विश्वास उठ गया है।लोग नेताओं को नेता नहीं लेता (पैसा लेने वाला) कहने में कोई संकोच नहीं करते। ऐसी स्थिति के लिए जनता नहीं पूरी तरह नेता जिम्मेवार हैं। भ्रष्टाचारी नेताओं को शर्म करनी चाहिए कि उनकी करतूत का खामियाजा न केवल जनता बल्कि देश को भुगतना पड़ता है। उनके गलत आचरण की वजह से लोग ईमानदार नेताओं को भी शक की नजर से देखने लगे हैं या अयोग्य कहने लगे हैं। ० आजकल चुनाव जीतते ही नेता महंगी गाड़ियों में घूमने लगते हैं, ऐसे में जनता में क्या संदेश जाता है?- गलत संदेश जाता है, लेकिन नेता यह नहीं समझते। उनकी नजरों में ऐसा करना वे अपनी शान समझते हैं। सत्ता और कुर्सी के नशे में चूर बड़ी-बड़ी व महंगी गाडियों में चलने वाले नेता यह सोचते हैं कि इससे जनता पर उनका प्रभाव और रूवाब बढ़ रहा है, लेकिन असलियत में ऐसा नहीं है।० देश की ताजा राजनीतिक स्थिति पर कुछ कहिए?-बहुत दुखद है। यह कहना मुश्किल है कि आने वाले सालों में देश की क्या स्थिति होगी। हम जितना विकास की ओर जा रहे हैं नेता उतने ही भ्रष्टाचारी बनते जा रहे हैं। नेता घोटाला करने से बाज नहीं आते, इसका एक कारण कानून प्रक्रिया का सुस्त होना भी है। अदालतों व जांच एजंसियों पर राजनेताओं का प्रभाव या हस्तक्षेफ भी अन्य महत्वपूर्ण कारणों में से एक है।० क्या पश्चिम बंगाल में परिवर्तन संभव है?-मेरी नजर में केवल सत्ता परिवर्तन को परिवर्तन कहना सही नहीं होगा। सरकार बदलने से ही बदलाव आ जाएगा ऐसा सोचने वाले खुद को धोखे में रख रहे हैं। सही मायने में बदलाव तभी आएगा जब व्यवस्था (सिस्टम) और नीति बदलेगी। नेता निज हित को दरकिनार कर लोकहित में काम करने लगेंगे तभी सूरत बदलेगी, चाहे किसी भी पार्टी की सरकार क्यों न बने।० आप ने बतौर सांसद और लोकसभा अध्यक्ष में क्या फर्क महसूस किया?-काफी फर्क है। बतौर संसद पहुंचने पर केवल अपने क्षेत्र का विकास और पार्टी व संसद की गरिमा का ध्यान रखना होता है, लेकिन लोकसभा अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठने के बाद जिम्मेवार बहुत बढ़ जाती है। सदन का सही तरीके से संचालन करना, सभी दलों के सांसदों के साथ उचित व्यवहार करना, संसद के कीमती समय का ख्याल रखना समेत कई तरीके की जिम्मेवारी बढ़ जाती है ये जिम्मेदारियां एक सांसद पर नहीं होती। ० क्या कभी राज्यपाल बनने का प्रस्ताव मिला है?- मिले तो कई थे, लेकिन मैंने ठुकरा दिया। अब यह मत पूछिएगा क्यों।० कभी राष्ट्रपति बनने का प्रस्ताव मिला तो क्या करेंगे।-जब मिलेगा तब सोचा जाएगा।

तृणमूल कांग्रेस के विधायक की करतूत

शंकर जालान
कोलकाता। राज्य में विधानसभा चुनाव की तिथि का एलान हो गया है। विभिन्न राजनीतिक पार्टियों की ओर से जहां उम्मीदवारों के नाम पर विचार-विमर्श हो रहा है। वहीं, कई विधायक अप्रत्यक्ष रूप से जनता के बीच अपनी उपस्थिति दर्ज करने में जुट गए हैं। ज्यों-ज्यों चुनाव के दिन नजदीक आ रहे हैं। त्यों-त्यों विधायक हो या संभावित उम्मीदवार जनता तक पहुंचने का मौका तलाशने में लग गए हैं। इसी क्रम में जोड़ासांकू क्षेत्र के तृणमूल कांग्रेस के विधायक को बधाई देते कई होर्डिंग लगे हैं। इन होर्डिंग में वार्ड नांर 25, 41 व 42 में विधायक कोटे से वार्ड के विकास के लिए मुहैया कराई गई राशि का उल्लेख है। वार्ड नबंर 25 में 32 लाख, वार्ड नबंर 41 में 25.4 लाख और वार्ड नांर 42 में 36 लाख का जिक्र किया गया है। मजे की बात यह है कि इन होर्डिंगों में प्रचारक, प्रसारक व मुद्रक का उल्लेख नहीं है। होर्डिंग में विधायक को संबोधित करते हुए श्री, धन्यवाद व आदरणीय शद का इस्तेमाल किया गया। इन होर्डिंगों में न तो कहीं तृणमूल कांग्रेस का जिक्र है और न ही पार्टी का चुनाव चिन्ह दर्शाया गया है। वार्ड नूंर 25 व 41 में कुछ स्थानों पर लगे होर्डिंग में स्थानीय पार्षद तक का नाम नहीं है। केवल प्रसन्न मुद्रा में विधायक की फोटो और बड़े-बड़े अक्षरों में उनका नाम, प्रदत्त राशि व मद का जिक्र किया गया है। जाकि वार्ड नांर 42 में लगे होर्डिंग में पार्षद के नाम के साथ-साथ उसकी फोटो भी दिखाई दे रही है। इस बाबत जा वार्ड नांर 25 की पार्षद व तृणमूल कांग्रेस की नेता स्मिता बक्सी ने बात की गई तो उन्होंने बताया कि होर्डिंग मैंने नहीं लगाया है। संभवत: विधायक ने लगवाई है। इस सिलसिले में वार्ड नबंर 41 की पार्षद रीता चौधरी से तो बात नहीं हो सकी, लेकिन वार्ड नबंर 42 की पार्षद व भाजपा की नेता सुनीता झंवर ने भी कहा कि होर्डिंग मैंने नहीं लगाई है। यह पूछे जाने पर कि होर्डिंग किसने लगाई है और आप की फोटो होर्डिंग लगाने वाले को कहां से मिली? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि होर्डिंग विधायक ने लगाई है। रही बात मेरी फोटो की तो टेक्नोलॉजी इतनी हाई हो गई है कि कंप्यूटर व इंटरनेट के माध्यम से किसी नेता की फोटो हासिल करना कोई मुश्किल काम नहीं। उन्होंने कहा कि बिना उनकी जानकारी के लगे होर्डिंग को उन्होंने विरोध भी जताया था। वार्ड नबंर 25, 41 व 42 में लगे करीब साढ़े चार दर्जन से ज्यादा होर्डिंगों पर स्थानीय लोगों का कहना है कि ये विधायक की तरफ से सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का जरिया है। लोगों ने ाताया कि राज्य में 294 विधानसभा सीट है और कोलकाता शहर में 11। सभी विधायक अपने क्षेत्र के लिए विधायक कोटो से धनराशि मुहैया कराई जाती है और लगभग सभी विधायक इलाके के विकास के लिए इसे खर्च भी करते हैं, लेकिन दिनेश बजाज की तरह कोई प्रचार नहीं करता। लोगों ने इन होर्डिंगों पर होने वाले खर्च को अपव्यय और विधायक के प्रचार लोभी होने का संकेत बताया। लोगों ने कहा कि जहां चुनाव के मद्देनजर शहर से होर्डिंग समेत अन्य प्रकार की प्रचार सामग्री हटाई जा रही है। वहीं, विधायक द्वारा खुद को संबोधित करते धन्यवाद, श्री व आदरणीय शब्द उनकी मानसिकता को दर्शाता है। होर्डिंग लगाने के मसले पर जा जोड़ासांकू के विधायक दिनेश बजाज से बात की गई तो उन्होंने कहा कि ये होर्डिंगें पलिक यानी जनता ने लगाई है। यह पूछे जाने पर कि होर्डिंगों में प्रचारक-प्रसारक व मुद्रक का उल्लेख क्यों नहीं है? इसका जवाब भी उन्होंने जनता से मांगने को कहा। जनता के पास मुहैया कराई गई राशि के आंकड़े कहां से आए? क्या तीनों वार्डों की जनता को आप की एक ही फोटो मिली (जो होर्डिंग में छपी है)? क्या तीनों वार्डों की जनता ने एक ही होर्डिंग वालों से होर्डिंग बनाई? क्यों तीनों वार्डों में लगे होर्डिंगों की भाषा लगभग मेल खाली है? इन सवालों के जवाब में विधायक ने कुछ नहीं कहा। इन होर्डिंग को बनाने वाले कारीगर अजित दास ने बताया कि उन्होंने विधायक दिनेश बजाज के कहने पर सांबधित तीनों वार्डों के लिए कुल 56 होर्डिंग ानाई थी। पहले चरण में 22 और इसके बाद में 34। उन्होंने बताया कि होर्डिंग की डिजाइन, लेंगवेज (भाषा) और साइज (आकार) सा कुछ विधायक ने तय किया था।

Thursday, February 3, 2011

राजस्थान का वृंदावन




जहां आरती के वक्त आती थी कामधेनु
शंकर जालान
भारत में आदि काल से वृक्षों की पूजा की जाती है। लोगों में आस्था रहती है कि वृक्षों की पूजा करने मात्र से ही मनुष्य सुख को प्राप्त करता है। प्राचीन काल में वृक्षों की पूजा के लिए राजस्थान में आंदोलन भी चलाया गया था, जिसको दबाने पर लोगों ने अपने प्राणों की आहुति तक दे दी थी।ऐसा ही करीब एक हजार वर्ष पुराना एक चमत्कारी पेड़ राजस्थान के चिड़ावा जिले से लगभग २३ किलोमीटर दूर वृंदावन (भंडूदा) में है, जहां लोग आस्था से जुड़े रहने के कारण सदैव आते हैं। यह धाम काटली नदी के तट पर बसा होने के कारण और भी सुरम्य बन गया है।श्रीबिहारीजी महाराज के अनन्य भक्त स्वामी हरिदास के शिष्य संत शिरोमणि बाबा पुरुषोत्तमदास ने लगभग साढ़े चार सौ वर्ष पहले अपनी तपस्या के बल पर इस गांव को बसाया था। प्रति वर्ष कृष्ण जन्मोत्सव पर देश के कोने-कोने और विदेशों से भी काफी भक्तजन दर्शनार्थ व पर्यटन के उद्देश्य से यहां आते हैं व बाबा के चरणों में श्रद्धा सुमन चढ़ा कर मनौतियां मांगते हैं।गांव के जोहड़ में बाबा पुरुषोत्तमदास की तपोभूमि में पंच पेड़ दर्शनीय व पूज्यनीय स्थल के रूप में दिन-प्रतिदिन ख्यातिप्राप्त करता जा रहा है। लगभग एक बीघा में यह वृक्ष फैला है, जिसकी पांच शाखाएं एक ही जड़ से विकसित हुई जो आपस में जुड़ी हुई हैं। एक शाखा अलग होकर फिर मिली है। लगभग एक हजार वर्ष पुराना होने के बावजूद यह वृक्ष आज भी हरा-भरा रहता है।बाबा के भक्तों का मानना है कि इस पेड़ के मध्य बैठकर बाबा ने ध्यानमग्न होकर बिहारीजी की अराधना कर उनका आशीर्वचन प्राप्त किया था।बाबा पुरुषोत्तमदास का जन्म ४२३ वर्ष पूर्व सिद्धमुख (राजगढ़, चूरू, राजस्थान) में हुआ था। उनका ध्यान बचपन से ही ईश्वरीय भक्ति में था। तब भी उनके माता-पिता ने उनका विवाह ढांचेलिया परिवार में कर दिया। एक पुत्र और एक पुत्री को जन्म देने के बाद बाब गृहस्थ जीवन छोड़कर वृंदावन (मथुरा, उत्तर प्रदेश) में जाकर श्रीकृष्ण भक्ति में तल्लीन हो गए। उनकी प्रखरता और विद्धता को देखकर अन्य सप्त तपस्वी उनसे विद्वेष भाव रखने लगे।बाबा को यह रास नहीं आया और वहां से गुरु हरिदासजी से आशीर्वाद लेकर भारत-भ्रमण पर निकले। आमरावती पर्वत मालाओं पर विचरण कर एकता का संदेश देते हुए राधा-कृष्ण की मूर्ति लेकर एकांत स्थान की तलाश में निकल पड़ते। संयोगवश काटली नदी के किनारे जल और वृक्ष को देखकर उन्हें आनंद की अनुभूति हुई और इसे ही वृंदावन मानकर बाबा वहीं ध्यान में बैठ गए। उन्होंने इसी को अपनी कर्मस्थली मानकर इसका नाम वृंदावन रखा। उन्होंने इसी पंच पेड़ को पंच परमेश्वर मानकर तपोभूमि के रूप में विख्यात करवाया।कहते है गुरुदेव की बात को शिरोधार्य कर बाबा वहां से चल पड़े और राजस्थान में नया वृंदावन बसाया। यहां के प्रत्येक कुंज में बाबा ने बालकृष्ण के रूप को देखा और युगल जोड़ी के दर्शन किए। यहीं बाबा की तपोस्थली व पुण्यस्थली है।बाबा बड़े दयालु थे। अपने जीवन काल में दुखियों का दुख दूर करते हुए भगवत भक्ति की प्रेरणा देते थे। उनके पास कोई भी दुखियारा क्यों न गया हो वह खुश होकर लौटता था और बाबा उसे अपने आशीर्वाद व तप के प्रभाव से दुख मुक्त कर देते थे।ग्रमीणों की जवान पर यह किवंदती है कि बाबा सुबह-शाम आरती के वक्त जब शंख बजाते थे तो एक गाय पेड़ के नीचे आकर खड़ी हो जाती थी। बाबा उसके नीचे कमडंल रखने तो वह कमंडल गाय (कामधेनु) के दूध से भर जाता था। लोगों का मानना है कि इस पेड़ के नीचे मांगी गई मनौती पूर्ण होती हैं। इसलिए श्रद्धालु भक्तों का यहां नित्य प्रति आना-जाना लगा रहता है।श्रीबिहारीजी सेवा सदन (कोलकाता) के सदस्यों ने बताया कि वृंदावन (भडुंदा) को आकर्षण पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना है। पंच पेड़ के चारों तरफ संगमरमर युक्त चबूतरे का निर्माण करवाना है, बाबा की तपोभूमि पर स्थायी प्रकाश व्यवस्था व अन्य भी कई सुख-सुविधा की जरूरत है। इस बाबत जिला व राज्य प्रशासन से बातचीत चल रही है।मालूम हो कि यहां राजस्थान के अलावा असम, बिहार, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, तमिलनाडू, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब, हरियाणा, उड़ीसा, झारखंड व नेपाल से भी दर्शनार्थी आते हैं।बाबा की प्रेरणा और आशीर्वाद से कोलकाता में बसे बाबा के भक्तों ने मध्य कोलकाता के २, माधो किष्टो सेठ लेन में बाबा का भव्य मंदिर बनाया। २००३ यानी आठ साल पहले बने मंदिर में बाबा की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा बसंत पंचमी यानी सरस्वती पूजा के दिन की गई। तभी से संस्था बसंत पंचमी के दिन अपना वार्षिक उत्सव मंदिर के स्थापना दिवस के मनाती है। इस बार यह आयोजन आठ फरवरी को है।

Sunday, January 2, 2011

पत्रकार शंकर जालान को सम्मानित किया श्याम मंदिर घुसुड़ीधाम ने

कोलकाता। महानगर कोलकाता से प्रकाशित होने वाले राष्ट्रीय दैनिक जनसत्ता से जुड़े युवा पत्रकार शंकर जालान को धार्मिक खबरों के प्रति विशेष रूची रखने और उत्कृष्ट लेखन के लिए रविवार (२ जनवरी २०१०) को नेताजी इंडोर स्टेडियम में श्री श्याम मंदिर घुसुड़ीधाम परिवार सेवा ट्रस्ट की ओर से सम्मानित किया गया। ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्यों ने शंकर जालान को अंगवस्त्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। इस मौके पर सुप्रभात मीडिया के त्रिलोकचंद डागा, विधायक दिनेश बजाज और मोहम्मद सोहराब को भी सम्मानित किया गया। ट्रस्ट के तत्वावधान में हो रहे श्याम महाकुंभ मेला २०११ के मौके पर जालान, बजाज, सोहराब समेत कई लोगों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन सत्य सर्वदा पत्रिका के संपादक सुरेश भुवालका ने किया।

Saturday, September 25, 2010

दक्षिण भारत के प्रसिद्ध मंदिर की तर्ज पर बनाया जा रहा है पूजा पंडाल



शंकर जालान
मध्य कोलकाता के ताराचंद दत्त स्ट्रीट में बीते 41 वर्षों से यंग वायज क्ला की ओर से आयोजित होने वाली दुर्गापूजा विशाल व कलात्मक प्रतिमा के लिए जानी जाती है। इस बार यहां का पूजा पंडाल दक्षिण भारत के एक प्रसिद्ध मंदिर की तर्ज पर बनाया जा रहा है। पूजा पंडाल का उद्घाटन 12 अक्तूार को होगा। इस मौके पर राजनीतिक, सामाजिक व प्रशासनिक क्षेत्र से जुड़े कई जानेमाने लोग बतौर अतिथि मौजूद रहेंगे। पूजा के मुख्य आयोजक राकेश सिंह और विक्रांत सिंह ने बताया कि देश के विभिन्न शहरों में स्थित किसी न किसी मंदिर की हू-ब-हू आकृति का पंडाल बीते कई वर्षों से बनाया जा रहा है। इसी कड़ी में इस बार दक्षिण भारत के प्रसिद्ध मंदिर की तर्ज पर भव्य व कलात्मक पंडाल बनाया जा रहा है। सिंह ने बताया कि चंद्रा डेकोरेटर्स के कई कारीगर बीते कई सप्ताह से पंडाल बनाने में जुटे हैं। उन्होंने बताया कि पंडाल की तुलना में वे चाहते हैं कि प्रतिमा अधिक कलात्मक और दर्शनीय हो।
सिंह ने बताया कि कई सालों से उल्टाडांगा के मूर्तिकार सनातन रुद्र पाल हमारे पूजा पंडाल के लिए प्रतिमा ानाते आ रहे थे। बीते साल मूर्तिकार तारक पाल ने मां दुर्गा समेत गणेश, कार्तिक, लक्ष्मी व सरस्वती की मूर्ति बनाई थी, लेकिन इस बार सुबोधचंद्र पाल को प्रतिमा बनाने का जिम्मा दिया गया है। सिंह के मुताबिक एक प्लेट पर मिट्टी से बनी प्रतिमा में मूर्तिकार क्ला के सदस्यों की सोच और अपने अनुभव से ऐसी कलाकृत्ति प्रस्तुत करता है कि देखने वाले देखते ही रह जाते हैं।
बिजली सज्जा के सवाल पर विनोद सिंह ने बताया कि तारातंद दत्त स्ट्रीट के दोनों छोर (रवींद्र सरणी से चित्तरंजन एवेन्यू तक) पर बल्बों की लटकन, वृक्षों पर पर्यावरण के महत्त्व को उजागर करने के मकसद से हरी ट्यूब लाइट और पंडाल के समीप काफी संख्या में हेलोजिन लाइटें लगाई जाएंगी। सिंह ने बताया कि पंडाल के भीतर लगने वाला विशाल झूमर भी देखने लायक होगा। बिजली सज्जा की जिम्मेवारी एसके इलेक्ट्रिक व जीके इलेक्ट्रिक के कंधे पर है। उन्होंने बताया कि कलात्मक प्रतिमा के लिए क्ला को कई बार विभिन्न सरकारी व गैरसरकारी संगठनों की ओर से पुरस्कत किया गया है और उनके पंडाल में रखी प्रतिमाओं को संग्रहालयों में भी भेजा गया है।

Friday, September 24, 2010


मैं हो गईं सरताज ।
देखो, मेरी चुटकी में है ताज ।।

आर्थिक असमानता को खत्म करना जरूरी - राष्ट्रपति

कोलकाता से शंकर जालान
कोलकाता, राष्ट्रपति प्रतिभा देवीसिंह पाटील ने कहा कि देश के आर्थिक विकास में मारवाड़ी समाज की सराहनीय भूमिका रही है। बावजूद इसके आर्थिक असमानता बढ़ती जा रही है। इसे खत्म करने के लिए न केवल मारवाड़ी समाज के लोगों को, बल्कि देश के हर नागरिक को अपने-अपने स्तर पर प्रयास करना होगा। उन्होंने कहा कि सही मायने में देश का विकास तभी होगा, जब महिलाएं शिक्षित होंगी। राष्ट्रपति ने ये बातें शेक्सपियर सरणी स्थित संगीत कला मंदिर के सभागार में कही। उन्होंने कहा कि कारोबार में नैतिकता जरूरी है।
अखिल भारतवर्षीय मारवाड़ी सम्मेलन (अभामस) के कौस्तुभ जयंती (75 वर्ष पूरे होने) के मौके पर बतौर उद्घाटनकर्ता राष्ट्रपति ने महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए कहा कि अभासम की स्थापना 1935 में समाज के विकास और इसमें व्याप्त कुरीतियों पर रोक लगाने के उद्देश्य से की गई थी। उन्होंने कहा कि न केवल कोलकाता अपितु देश के जिन-जिन शहरों में मारवाड़ी गए वहां की संस्कृति, भाषा और परिवेश को न केवल अपनाया, बल्कि वहां के लोगों के दुख-दर्द में शामिल भी हुए।
उन्होंने कहा कि मारवाड़ी समाज के लोगों ने स्वाधीनता संग्राम में जो योगदान दिया है, उसे भुलाया नहीं जा सकता। इसके अलावा युद्ध, बाढ़, अकाल, भूकंप व सूखा जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भी सेवा करने वालों की कतार में मारवाड़ी समाज के लोग अग्रणी पंक्ति में खड़े थे।
राष्ट्रपति ने नारी शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि अच्छी पढ़ाई दीर्घकालीन निवेश है। शिक्षा को लड़का-लड़की में बांटना ठीक नहीं है। उन्होंने केंद्र सरकार की इस पहल का स्वागत किया, जिसमें अनिवार्य और प्राथमिक शिक्षा को नि:शुल्क रूप मुहैया कराने की बात कही गई है।
इससे पहले राज्यपाल एमके नारायणन ने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में मारवाड़ी समाज के लोगों ने अतुलनीय व अनुसणीय काम किया है। मारवाड़ी सम्मेलन का नाम आने वाले दिनों में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा कि आज देश में कई महत्वपूर्ण पदों पर महिलाएं आसीन है, जैसे राष्ट्रपति, लोकसभा अध्यक्ष, संयुक्त प्रगतिशील सरकार (संप्रग) की चेयरमैन के अलावा कई महिलाओं को केंद्रीय मंत्री का दर्जा मिला हुआ है तो कई राज्यों की मुख्यमंत्री महिला हैं। इसके बावजूद महिला आरक्षण बिल का लंबित पड़ा रहता दुखद है।
कौस्तुभ जयंती समारोह के चेयरमैन सीताराम शर्मा ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि अभामस सामाजिक सुधार की दिशा में तत्परता व तेजी से काम करे। अभामस के अध्यक्ष नंदलाल रूंगटा ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि संस्था समाज सुधार के क्षेत्र में स्थापना काल से व्यापक स्तर पर काम कर रही है। अभामस के प्रयास से लोगों में जागरूकता बढ़ी है। जहां पर्दा प्रथा पर अंकुश लगा है। वहीं, विधवा महिलाओं के विवाह में तेजी आई है।
कार्यक्रम में अभामस के कौस्तुभ जयंती के मौके पर भारत सरकार के डाक विभाग द्वारा ‘स्पेशल पोस्टल कवर’ जारी किया गया। इस मौके पर अभामस की ओर से राष्ट्रपति, राज्यपाल, सांसद, राज्य के कृषि मंत्री नरेद दे व देवीसिंह शेखावत को संस्था का प्रतीक चिन्ह भेंट किया गया। कार्यक्राम का संचालन अभामस के संयुक्त सचिव संजय हरलालका ने किया और सचिव राम अवतार पोद्दार ने धन्यवाद दिया। समारोह को सफल बनाने में आत्माराम सोंथलिया, ओमप्रकाश पोद्दार, कैलाशपति तोदी समेत कई लोगों ने सक्रिय भूमिका निभाई।
शंकर जालान
फोटो परिचय - अखिल भारतवर्षीय मारवाड़ी सम्मेलन के कौस्तुभ जयंती भारत सरकार के डाक विभाग द्वारा ‘स्पेशल पोस्टल कवर’ की पहली प्रति राष्ट्रपति को भेंट करते राज्यपाल एमके नारायणन। कोलकाता से शंकर जालान