संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) अली बाबा और चालीस चोरों की सरकार है। संप्रग सरकार की दूसरी पारी में जितने घोटाले हुए हैं उतने स्वतंत्र भारत में अब तक नहीं हुए होंगे। बावजूद इसके सरकार इस पर अंकुश लगाने के कालेधन व भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन करने वाले योग गुरू बाबा रामदेव पर असभ्य टिप्पणी कर रही है। कांग्रेस के एक नेता बाबा रामदेव को ठग की अपमा दे रहे हैं और कांग्रेस आलाकमान मौन हैं। बीते महीने पांच राज्यों में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा की शर्मनाक हार, कालेधन-भ्रष्टाचार-घोटाले पर पार्टी की रणनीति और उमा भारती की घर वापसी के मुद्दे पर भाजपा के वरिष्ठ नेता व पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और सांसद मुख्तार अब्बास नकवी से कोलकाता में शंकर जालान ने बातचीत की। पेश है बातचीत के चुनिंदा अंश-
० काले धन व भ्रष्टाचार के मसले में क्या भाजपा योग गुरू बाबा रामदेव और सामाजिक कार्यकर्ता अण्णा हजारे के साथ है?
--हमारी पार्टी किसी बाबा और सामाजिक कार्यकर्ता के साथ नहीं हैं। हां, इन लोगों द्वारा उठाए गए मुद्दों के साथ भाजपा अवश्य हैं। आप को ध्यान हो इन मुद्दों पर आंदोलन की शुरुआत करने वाली भाजपा ही है। रामदेव व हजारे तो अभी यानी कुछ सप्ताह पहले भ्रष्टाचार के खिलाफ अनशन व सत्याग्रह शुरू किया है।
० आप के शब्दों में भाजपा के उठाए गए मुद्दों को रामदेव व हजारे हवा दे रहे हैं?
--मैंने ऐसा नहीं कहा। मेरे कहने का मतलब है कि काले धन व भ्रष्टाचार के प्रति लोगों को जागरूक करने का काम सबसे पहले भाजपा ने किया है। यह और बात है कि उस वक्त हमें इतना समर्थन नहीं मिला।
० तो क्या रामदेव व हजारे के सहारे भाजपा फिर खड़ी होना चाहती है?
--भाजपा बैठी ही कब थी, कि उसे खड़ी होने की जरूरत पड़े। भाजपा लगातार जनता हित, समाज हित और देश हित में काम करती आ रही है और करती रहेगी।
० बीते महीनें हुए पांच राज्यों के चुनाव परिणाम तो यहीं बताते हैं कि पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडू, केरल व पांडूचेरी में भाजपा लगभग सोई हुई नजर आई?
--इन पांच राज्यों में ही भारत सिमटा हुआ नहीं है। गुजरात, मध्यप्रदेश, कर्नाटक, छत्तीसगढ और बिहार में न केवल हमारी सरकार है, बल्कि बेहतर काम भी कर रही है।
० आपको नहीं लगता कि रामदेव का सत्याग्रह और अण्णा हजारे का अनशन अब राजनीति रंग लेता जा रहा है?
--भले ही बाबा रामदेव व अण्णा हजारे सक्रिय राजनीति से न जुड़े हो, लेकिन इन लोगों ने जो मुद्दा उठाया है उसका समाधान तभी संभव है राजनीति स्तर से ही संभव है। इसलिए यह कहना शायद गलत होगा कि मुद्दे ने राजनीतिक रंग ले लिया है। इसके बदले अगर यह कहे कि मुद्दे को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है, तो ज्यादा ठीक होगा।
०कौन मुद्दों के राजनीतिक रंग दे रहा है?
--बेशक कांग्रेस और उसके नेता।
०सुना तो यह जा रहा है कि बाबा रामदेव व अण्णा हजारे भाजपा के एजंट के रूप में काम कर रहे हैं? इस पर आप की क्या प्रतिक्रिया है?
--मेरे कानों तब अभी ऐसी कोई बात नहीं आई है। वैसे तो कांग्रेस की आदत ही है कि जो काले धन की बात करे वह भाजपा का आदमी है, जो भ्रष्टाचार की बात करे वह आरएसएस का।
०कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्गविजय सिंह ने भाजपा को नाचने वालों की पार्टी करार दिया है। इस पर आप का क्या कहना है?
--जो कहेगी, देश की जनता कहेगी। देश की जनता जानती है कि किस पार्टी में कितने सभ्य और सुलझे हुए विचारों के नेता हैं।
० काले धन, भ्रष्टाचार व घोटाले पर संप्रग सरकार से क्या आशाएं रखते हैं?
-- कुछ नहीं, संप्रग सरकार सही मायने में अली बाबा चालीस चोरों की सरकार है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह व संप्रग की चेयरमैन सोनिया गांधी को सबसे पहले देशवासियों को यह बताना चाहिए कि चार जून की रात ऐसा क्या हुआ कि रामलीला मैदान पर सत्याग्रह पर बैठे लोगों को पुलिस ने बेहरमी से खदेड़ दिया। केंद्र सरकार की इस कार्रवाई ने लोगों को यह बता दिया कि संप्रग सरकार में कोई भरोसे लायक नहीं है।
०क्या तृणमूल कांग्रेस प्रमुख व पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी नहीं?
-बेशक ममता बनर्जी की छवि एक ईमानदारी नेता के रूप में है, लेकिन काले धन, भ्रष्टाचार व घोटालों पर उनकी चुप्पी उनकी छवि पर प्रश्नचिन्ह लगाती है।
०केंद्र सरकार अब बाबा की संपत्ति को लेकर उसे घेरने के मूड पर, इस बार आप की क्या राय है?
-सरकार जांच किसी पर भी करवा सकती है। चाहे वह बाबा हो या फिर हजारे। मैं आप को बता दूं भाजपा न तो रामदेव को जयप्रकाश नारायण मानते हैं और न ही अण्णा को महात्मा गांधी।
०उमा भारती की घर वापसी यानी भाजपा में लौटने को आप क्या मानते हैं?
-निश्चित तौर पर इससे पार्टी मजबूत होगी।
Sunday, June 19, 2011
Sunday, June 5, 2011
धूएं में उड़ता रहा विश्व धूम्रपान विरोधी दिवस
शंकर जालान
कोलकाता, विश्व धूम्रपान विरोधी दिवस यानी मंगलवार (31 मई) को महानगर और आसपास के इलाकों में ऐसे कई नजारे देखने को मिले, जिसे देखकर यह कहना गलत नहीं होगा कि सिरगेरट-बीड़ी पीने के आदि लोग धूम्रपान विरोधी दिवस को नि:संकोच धुआं उड़ाते रहे। केंद्र व राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग के अलावा विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों की ओर से धूम्रपान के खिलाफ लोगों को आगाह करने के बावजूद आज कई लोग खुले आम धुआं उड़ाते देखे गए।मंगलवार को शहर में कई स्थानों पर धूम्रपान विरोधी दिवस के मद्देनजर कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। कहीं संगोष्ठी, कहीं सभा तो कही रैली निकाली गई। इन कार्यक्रम में लोगों ने धूम्रपान को स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बताते हुए इसे जानलेवा कहा। नेताजी सुभाष चंद्र बोस कैंसर रिसर्च इंस्टीट्यूट की ओर से धूम्रपान के खिलाफ जनजागरण अभियान चलाया गया। इस मौके पर कोलकाता के पुलिस आयुक्त आरके पचनंदा भी मौजूद थे। विश्व स्वास्थ्य संगठन की सर्वेक्षण रिपोर्ट के मुताबिक विश्व में हर साल तंबाकू से 5.4 मिलियन लोगों की मौत होती है। वहीं, एएमआरआई अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक प्रसनजीत चटर्जी के मुताबिक धूम्रपान जानलेवा है। उन्होंने कहा कि 90 से 95 फीसद लोगों को सिगरेट की वजह कैंसर होता है। इस मौके पर डॉ. आशीष मुखर्जी ने कहा कि सिगरेट के पैकेट पर चेतावनी प्रकाशित करने के बावजूद दिल्ली, मुंबई और चेन्नई के मुकाबले कोलकाता में सिगरेट पीने वालों की तादाद ज्यादा है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में हर साल कैंसर के 75 हजार नए मरीज सामने आ रहे हैं।एक सर्वेक्षण के मुताबिक तमाम तरह की चेतावनी और सिगरेट के पैकेट पर छपी गंभीर फोटो के बाद भी सिगरेट पीने वालों की तादाद में गिरावट नहीं आ रही है और यह चिंता का विषय है। व्यस्क युवकों के अलावा इनदिनों महिलाओं व किशोर में भी सिगरेट पीने का चलन बढ़ा है। इस एक मात्र कारण खुलेआम सिगरेट-बीडी की बिक्री माना जा रहा है। कानूनत: दुकानदार 18 वर्ष से कम के आयु के किशोर को सिगरेट-बीड़ी नहीं बेच सकते, लेकिन न तो दुकानदार इस कानून को मान रहे हैं और न ही किशोर सिगरेट-बीड़ी खरीदने व पीने से बाज आ रहे हैं।विशेषज्ञों के मुताबिक शहरों में युवाओं में धूम्रपान की आदत में लगातार इजाफा हो रहा है। अब लड़कियां भी इसमें पीछे नहीं। धूम्रपान का यह शौक कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियों का कारण भी बन रहा है। लगातार धूम्रपान करने वाली लड़कियों में गर्भावस्था में बच्चे में विकार पैदा होने की संभावना सबसे ज्यादा होती है। हुक्का पीना इन दिनों शहर के युवाओं का नया शगल बन गया है। चिकित्सकों के मुताबिक हुक्के के धुएं से सांस की बीमारी और दूसरी समस्या होना आम है। आधुनिक युग में रॉक म्यूजिक, रंग-बिरंगी रोशनी, गड़ाड़ाहट की आवाज के साथ उठता धुआं। ब्रेफिक बिंदास युवा पीढ़ी गम के साथ खुशियों को भी सिगरेट और हुक्के के धुएं में उड़ा रही है। अपने भविष्य से अनजान ये युवा हर कश के साथ अनचाही बीमारियों को न्यौता दे रहे हैं। दुखद यह है कि सिगरेट के धुएं को लड़कों के साथ लड़कियां भी बिंदास अंदाज में उड़ा रही है। विशेषज्ञों ने बताया कि छोटी उम्र में धूम्रपान की आदत गर्भावस्था के समय परेशानी का कारण बनती है। मां बनने के समय बच्चे में इस धूम्रपान का बेहद प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और बच्चे में कई विकार दिखते हैं।डॉक्टरों का कहना है कि धुआं किसी भी प्रकार से लिया जाए वह फेफड़ों के लिए नुकसानदायक होता है। इससे सांस की बीमारी, फेफड़े कमजोर होना, खांसी, दमा और इंफेक्शन का खतरा सबसे ज्यादा होता है। हुक्का में धुएं उड़ाने की आदत युवाओं को सिगरेट और दूसरे व्यसनों की ओर बढ़ाती है। सिगरेट और गुटखा से फेफड़ों का कैंसर और ओरल कैंसर होते हैं। धूम्रपान से हृदय गति और याददाश्त कमजोर होना जैसी समस्या भी हो रही है।
कोलकाता, विश्व धूम्रपान विरोधी दिवस यानी मंगलवार (31 मई) को महानगर और आसपास के इलाकों में ऐसे कई नजारे देखने को मिले, जिसे देखकर यह कहना गलत नहीं होगा कि सिरगेरट-बीड़ी पीने के आदि लोग धूम्रपान विरोधी दिवस को नि:संकोच धुआं उड़ाते रहे। केंद्र व राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग के अलावा विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों की ओर से धूम्रपान के खिलाफ लोगों को आगाह करने के बावजूद आज कई लोग खुले आम धुआं उड़ाते देखे गए।मंगलवार को शहर में कई स्थानों पर धूम्रपान विरोधी दिवस के मद्देनजर कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। कहीं संगोष्ठी, कहीं सभा तो कही रैली निकाली गई। इन कार्यक्रम में लोगों ने धूम्रपान को स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बताते हुए इसे जानलेवा कहा। नेताजी सुभाष चंद्र बोस कैंसर रिसर्च इंस्टीट्यूट की ओर से धूम्रपान के खिलाफ जनजागरण अभियान चलाया गया। इस मौके पर कोलकाता के पुलिस आयुक्त आरके पचनंदा भी मौजूद थे। विश्व स्वास्थ्य संगठन की सर्वेक्षण रिपोर्ट के मुताबिक विश्व में हर साल तंबाकू से 5.4 मिलियन लोगों की मौत होती है। वहीं, एएमआरआई अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक प्रसनजीत चटर्जी के मुताबिक धूम्रपान जानलेवा है। उन्होंने कहा कि 90 से 95 फीसद लोगों को सिगरेट की वजह कैंसर होता है। इस मौके पर डॉ. आशीष मुखर्जी ने कहा कि सिगरेट के पैकेट पर चेतावनी प्रकाशित करने के बावजूद दिल्ली, मुंबई और चेन्नई के मुकाबले कोलकाता में सिगरेट पीने वालों की तादाद ज्यादा है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में हर साल कैंसर के 75 हजार नए मरीज सामने आ रहे हैं।एक सर्वेक्षण के मुताबिक तमाम तरह की चेतावनी और सिगरेट के पैकेट पर छपी गंभीर फोटो के बाद भी सिगरेट पीने वालों की तादाद में गिरावट नहीं आ रही है और यह चिंता का विषय है। व्यस्क युवकों के अलावा इनदिनों महिलाओं व किशोर में भी सिगरेट पीने का चलन बढ़ा है। इस एक मात्र कारण खुलेआम सिगरेट-बीडी की बिक्री माना जा रहा है। कानूनत: दुकानदार 18 वर्ष से कम के आयु के किशोर को सिगरेट-बीड़ी नहीं बेच सकते, लेकिन न तो दुकानदार इस कानून को मान रहे हैं और न ही किशोर सिगरेट-बीड़ी खरीदने व पीने से बाज आ रहे हैं।विशेषज्ञों के मुताबिक शहरों में युवाओं में धूम्रपान की आदत में लगातार इजाफा हो रहा है। अब लड़कियां भी इसमें पीछे नहीं। धूम्रपान का यह शौक कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियों का कारण भी बन रहा है। लगातार धूम्रपान करने वाली लड़कियों में गर्भावस्था में बच्चे में विकार पैदा होने की संभावना सबसे ज्यादा होती है। हुक्का पीना इन दिनों शहर के युवाओं का नया शगल बन गया है। चिकित्सकों के मुताबिक हुक्के के धुएं से सांस की बीमारी और दूसरी समस्या होना आम है। आधुनिक युग में रॉक म्यूजिक, रंग-बिरंगी रोशनी, गड़ाड़ाहट की आवाज के साथ उठता धुआं। ब्रेफिक बिंदास युवा पीढ़ी गम के साथ खुशियों को भी सिगरेट और हुक्के के धुएं में उड़ा रही है। अपने भविष्य से अनजान ये युवा हर कश के साथ अनचाही बीमारियों को न्यौता दे रहे हैं। दुखद यह है कि सिगरेट के धुएं को लड़कों के साथ लड़कियां भी बिंदास अंदाज में उड़ा रही है। विशेषज्ञों ने बताया कि छोटी उम्र में धूम्रपान की आदत गर्भावस्था के समय परेशानी का कारण बनती है। मां बनने के समय बच्चे में इस धूम्रपान का बेहद प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और बच्चे में कई विकार दिखते हैं।डॉक्टरों का कहना है कि धुआं किसी भी प्रकार से लिया जाए वह फेफड़ों के लिए नुकसानदायक होता है। इससे सांस की बीमारी, फेफड़े कमजोर होना, खांसी, दमा और इंफेक्शन का खतरा सबसे ज्यादा होता है। हुक्का में धुएं उड़ाने की आदत युवाओं को सिगरेट और दूसरे व्यसनों की ओर बढ़ाती है। सिगरेट और गुटखा से फेफड़ों का कैंसर और ओरल कैंसर होते हैं। धूम्रपान से हृदय गति और याददाश्त कमजोर होना जैसी समस्या भी हो रही है।
फ्लाईओवर के कारण बंग होने की कगार पर हैं कई पेट्रोल पंप
महानगर कोलकाता
शंकर जालान
कोलकाता। महानगर कोलकाता के निवासियों को जाम की समस्या से निजात दिलाने के लिए और वाहन का चक्का हर चौराहे पर न रूके व उसमें बैठे मुसाफिर सही समय पर अपने गंतव्य स्थान पर पहुंच सके इसके लिए इन दिनों उत्तर से दक्षिण कोलकाता के बीच कई मुख्य रास्तों पर फ्लाई ओवर (उड़ान पुल) का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर जारी है। आम लोगों के लिए भले ही यह अच्छी खार हो, लेकिन इन मार्गों पर पड़ने वाले कई पेट्रोल पंपों में बिक्री के लिहाज से यह बुरी खबर है। इस वजह से कुछ पेट्रोल पंप बंद होने के कगार पर है। इन पेट्रोल पंपों के मालिकों का कहना है कि बेशक फ्लाई ओवर बनने से आम लोगों को राहत मिलेगी और शहर की सड़कों की जाम की समस्या भी कम होगी, लेकिन इससे साथ-साथ उनके पेट्रोल पंप की बिक्री भी प्रभावित होगी।आचार्य जगदीशचंद्र बोस रोड पर स्थित एचपी कंपनी के एक पेट्रोल पंप के प्रांधक ने कहा कि जा से रेस कोर्स और पार्क सर्कस को जोड़ने वाला फ्लाई ओवर चालू हुआ है, तब से उनके पेट्रोल पंप की बिक्री लगभग आधी हो गई है। इसमें भी ज्यादा प्रभावित पेट्रोल की बिक्री हुई है। इसका खुलासा करते हुए उन्होंने कहा कि फ्लाई ओवर बनने के बाद अधिकर छोटे वाहन (टैक्सी, निजी गाड़ी, स्कूटर और मोटरसाइकिल) जो पेट्रोल से चलते है वे यह रास्ता तय करने के लिए प्राथमिक तौर पर फ्लाई ओवर का इस्तेमाल करते हैं। इसलिए अगर उन्हें ईधन की जरूरत होती है तो या तो वे फ्लाई ओवर पर चढ़ने से पहले पेट्रोल खरीद लेते हैं या फिर उड़ान पुल से उतरने के बाद खरीदते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ बस और मिनी बस आदि जो इस रूट पर चलती हैं उन्हीं के चालक हमारे पंप से डीजल खरीदते हैं। इनमें भी ज्यादातर बस वाले एक निर्धारित पंप से ही डीजल खरीदना पसंद करते हैं। कुछ चालक हैं जो नियमित रूप से हमारे पंप से डीजल खरीदते हैं, लेकिन उन्हें अपना ग्राहक बनाए रखने के लिए हमें उधार की सुविधा देनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि हमें कंपनी को अग्रिम चेक या ड्राफ्ट देकर डीजल और पेट्रोल खरीदना और बस चालकों को सात से दस दिन की उधारी पर बेचना पड़ता है। उन्होंने कहा कि फ्लाई ओवर बनने से पहले यह नौबत नहीं थी। डीजल के साथ-साथ अच्छी-खासी मात्रा में पेट्रोल बिकता था और वह भी उधार नहीं नगद, लेकिन आ पेट्रोल खरीदने वाले ग्राहकों का तो घंटों इंतजार करना पड़ता है।इसी तरह दक्षिण कोलकाता के डायमंड हार्बर रोड स्थित तारातला चौराहे पर जाम की समस्या से छुटकारा दिलाने के लिए बने फ्लाई ओवर ने इस समस्या से यात्रियों को निजात तो अवश्य दिला दी, लेकिन तारातला के विपरीत स्थित आईओ कंपनी के पेट्रोल पंप को बंद होने के कगार पर ला दिया। पंप पर काम करने वाले एक कर्मचारी ने बताया कि फ्लाई ओवर निर्माण के पहले उसे ग्राहकों को डीजल व पेट्रोल देने की फुर्सत नहीं मिलती थी। दिन भर नोजल (डीजल-पेट्रोल डिलीवरी का यंत्र) हाथों में रहता था और पंप पर वाहनों की कतार लगी रहती थी, लेकिन आ तो ऐसा ख्याल मन में लाना स्वपन देखने के बराबर लगता है। पहले जहां दिनभर में एक टैंकर (दस हजार लीटर) डीजल-पेट्रोल आराम से बिक जाया करता था, लेकिन आ तो इतनी मात्रा में डीजल-पेट्रोल की खपत एक सप्ताह में भी नहीं हो पाती है।वहीं, मध्य कोलकाता में गिरीश पार्क और पोस्ता बाजार के बीच बन रहे फ्लाई ओवर ने विवेकानंद रोड स्थित बीपी कंपनी के पेट्रोल पंप के अस्तित्व पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। पंप के खंजाची का कहना है कि ज्यों-ज्यों फ्लाई ओवर निर्माण के काम में तेजी आ रही है, त्यों-त्यों उनके पंप की बिक्री कम होती जा रही है। उन्होंने बताया कि विवेकानंद रोड वन वे यानी एक तरफा रास्ता है इस रास्ते पर केवल पोस्ता बाजार से आने वाले वाहन ही चलते हैं और फ्लाई ओवर निर्माण के कारण जहां-तहां रास्तों की खुदाई कर दी गई है, जिस वजह से अपने वाहनों के लिए डीजल-पेट्रोल लेने की इच्छुक चालक उनके पंप तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। उन्होंने बताया कि जा अभी से यह हाल है तो फ्लाई ओवर बनने और चालू होने के बाद तो मानों ग्राहकों के इंतजार में हाथ पर हाथ धरे बैठा रहना पड़ेगा।
शंकर जालान
कोलकाता। महानगर कोलकाता के निवासियों को जाम की समस्या से निजात दिलाने के लिए और वाहन का चक्का हर चौराहे पर न रूके व उसमें बैठे मुसाफिर सही समय पर अपने गंतव्य स्थान पर पहुंच सके इसके लिए इन दिनों उत्तर से दक्षिण कोलकाता के बीच कई मुख्य रास्तों पर फ्लाई ओवर (उड़ान पुल) का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर जारी है। आम लोगों के लिए भले ही यह अच्छी खार हो, लेकिन इन मार्गों पर पड़ने वाले कई पेट्रोल पंपों में बिक्री के लिहाज से यह बुरी खबर है। इस वजह से कुछ पेट्रोल पंप बंद होने के कगार पर है। इन पेट्रोल पंपों के मालिकों का कहना है कि बेशक फ्लाई ओवर बनने से आम लोगों को राहत मिलेगी और शहर की सड़कों की जाम की समस्या भी कम होगी, लेकिन इससे साथ-साथ उनके पेट्रोल पंप की बिक्री भी प्रभावित होगी।आचार्य जगदीशचंद्र बोस रोड पर स्थित एचपी कंपनी के एक पेट्रोल पंप के प्रांधक ने कहा कि जा से रेस कोर्स और पार्क सर्कस को जोड़ने वाला फ्लाई ओवर चालू हुआ है, तब से उनके पेट्रोल पंप की बिक्री लगभग आधी हो गई है। इसमें भी ज्यादा प्रभावित पेट्रोल की बिक्री हुई है। इसका खुलासा करते हुए उन्होंने कहा कि फ्लाई ओवर बनने के बाद अधिकर छोटे वाहन (टैक्सी, निजी गाड़ी, स्कूटर और मोटरसाइकिल) जो पेट्रोल से चलते है वे यह रास्ता तय करने के लिए प्राथमिक तौर पर फ्लाई ओवर का इस्तेमाल करते हैं। इसलिए अगर उन्हें ईधन की जरूरत होती है तो या तो वे फ्लाई ओवर पर चढ़ने से पहले पेट्रोल खरीद लेते हैं या फिर उड़ान पुल से उतरने के बाद खरीदते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ बस और मिनी बस आदि जो इस रूट पर चलती हैं उन्हीं के चालक हमारे पंप से डीजल खरीदते हैं। इनमें भी ज्यादातर बस वाले एक निर्धारित पंप से ही डीजल खरीदना पसंद करते हैं। कुछ चालक हैं जो नियमित रूप से हमारे पंप से डीजल खरीदते हैं, लेकिन उन्हें अपना ग्राहक बनाए रखने के लिए हमें उधार की सुविधा देनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि हमें कंपनी को अग्रिम चेक या ड्राफ्ट देकर डीजल और पेट्रोल खरीदना और बस चालकों को सात से दस दिन की उधारी पर बेचना पड़ता है। उन्होंने कहा कि फ्लाई ओवर बनने से पहले यह नौबत नहीं थी। डीजल के साथ-साथ अच्छी-खासी मात्रा में पेट्रोल बिकता था और वह भी उधार नहीं नगद, लेकिन आ पेट्रोल खरीदने वाले ग्राहकों का तो घंटों इंतजार करना पड़ता है।इसी तरह दक्षिण कोलकाता के डायमंड हार्बर रोड स्थित तारातला चौराहे पर जाम की समस्या से छुटकारा दिलाने के लिए बने फ्लाई ओवर ने इस समस्या से यात्रियों को निजात तो अवश्य दिला दी, लेकिन तारातला के विपरीत स्थित आईओ कंपनी के पेट्रोल पंप को बंद होने के कगार पर ला दिया। पंप पर काम करने वाले एक कर्मचारी ने बताया कि फ्लाई ओवर निर्माण के पहले उसे ग्राहकों को डीजल व पेट्रोल देने की फुर्सत नहीं मिलती थी। दिन भर नोजल (डीजल-पेट्रोल डिलीवरी का यंत्र) हाथों में रहता था और पंप पर वाहनों की कतार लगी रहती थी, लेकिन आ तो ऐसा ख्याल मन में लाना स्वपन देखने के बराबर लगता है। पहले जहां दिनभर में एक टैंकर (दस हजार लीटर) डीजल-पेट्रोल आराम से बिक जाया करता था, लेकिन आ तो इतनी मात्रा में डीजल-पेट्रोल की खपत एक सप्ताह में भी नहीं हो पाती है।वहीं, मध्य कोलकाता में गिरीश पार्क और पोस्ता बाजार के बीच बन रहे फ्लाई ओवर ने विवेकानंद रोड स्थित बीपी कंपनी के पेट्रोल पंप के अस्तित्व पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। पंप के खंजाची का कहना है कि ज्यों-ज्यों फ्लाई ओवर निर्माण के काम में तेजी आ रही है, त्यों-त्यों उनके पंप की बिक्री कम होती जा रही है। उन्होंने बताया कि विवेकानंद रोड वन वे यानी एक तरफा रास्ता है इस रास्ते पर केवल पोस्ता बाजार से आने वाले वाहन ही चलते हैं और फ्लाई ओवर निर्माण के कारण जहां-तहां रास्तों की खुदाई कर दी गई है, जिस वजह से अपने वाहनों के लिए डीजल-पेट्रोल लेने की इच्छुक चालक उनके पंप तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। उन्होंने बताया कि जा अभी से यह हाल है तो फ्लाई ओवर बनने और चालू होने के बाद तो मानों ग्राहकों के इंतजार में हाथ पर हाथ धरे बैठा रहना पड़ेगा।
वृक्ष धरा का हैं श्रंगार, इनसे करो सदा तुम प्यार
विश्व पर्यावरण दिवस आज
शंकर जालान
रविवार को विश्व पर्यावरण दिवस है, ऐसा दिवस जो दुनिया वालोंं को याद दिलाए कि उन्हें इस धरती के पर्यावरण को सुरक्षित रखना है। उसे अधिक बिगड़ने से रोकना है, उसे इस रूप में बनाए रखना है कि आने वाली पीढ़ियां उसमें जी सकें । अगर लोग पर्यावरण के विषय पर सजक नहीं हुए तो यह दिवस अपने उद्देश्य में शायद ही सफल हो पाएगा। जब तक लोग वृक्ष को धरती का श्रृंगार नहीं समझेंगे और हरियाली से प्यार नहीं करेंगे, तब तक पर्यावरण दिवस मनाना केवल औपचारिकता भर रहेगा। एक कवि ने कहा है-वृक्ष धरा का हैं श्रंगार, इनसे करो सदा तुम प्यार।इनकी रक्षा धर्म तुम्हारा, ये हैं जीवन का आधार।।कहने को तो दुनिया भर में वैश्विक स्तर पर अनेक दिवस मनाए जाते हैं। जैसे-इंटरनेशनल वाटर डे (22 मार्च), इंटरनेशनल अर्थ डे (22 अप्रैल), वर्ल्ड नो टोबैको डे (31 मई), इंटरनेशनल पाप्युलेशन डे (11 जुलाई), वर्ल्ड पॉवर्टी इरेडिकेशन डे (17 दिसंबर), इंटरनोनल एंटीकरप्शन डे (9 दिसंबर), आदि । इन सभी दिवसों का मूल उद्देश्य विभिन्न छोटी-बड़ी समस्याओं के प्रति मानव जाति का ध्यान खींचना हैं, उनके बीच जागरूकता फैलाना है, समस्याओं के समाधान के प्रति उनके योगदान की मांग करना है, लेकिन यह साफ-साफ नहीं बताया जाता है कि लोग क्या करें और कैसे करें ।जानकारों के मुताबिक पर्यावरण शब्द के अर्थ बहुत व्यापक हैं । सड़कों और खुले भूखंडों पर आम लोगों द्वारा फेंकी जाने वाली प्लास्टिक की थैलियों की समस्या पर्यावरण से ही संबंधित है । शहरों में ही नहीं, गांवों में भी विकसित हो रहे रिहायशी इलााके पर्यावरण को प्रदूषित ही करते हैं । भूगर्भ जल का असमिति दोहन अब पेयजल की गंभीर समस्या को जन्म दे रहा है। ऐसी तमाम समस्याओं के प्रति जागरूकता फैलाने की कोशिश की जा रही है, पांच जून को वर्ष में एक बार एक दिवस मनाकर । क्या जागरूकता की बात लगातार चलने वाली प्रक्रिया नहीं होनी चाहिए? एक दिन विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए पर्यावरण दिवस मनाना क्या कुछ ऐसा ही नहीं जैसे हम किसी का जन्मदिन मनाते हैं या कोई तीज-त्योहार ? एक दिन जोरशोर से मुद्दे की चर्चा करो और फिर 364 दिन के लिए उसे भूल जाओ ? ऐसा कर हम सही अर्थों में पर्यावरण की रक्षा नहीं कर पाएंगे।पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि इन दिनों पूरी दुनिया ग्लोबल वार्मिंग जैसी जटिल समस्या से लड़ने के उपाय ढूंढ रही हैं। वहीं, आप और हम अपनी दिनचर्या में थोड़ी सी सावधानी या बदलाकर पर्यावरण को बचाने में बड़ा योगदान कर सकते। प्रदूषण न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की भयानक समस्या है। मनुष्य के आसपास जो वायुमंडल है वह पर्यावरण कहलाता है। पर्यावरण का जीवजगत के स्वास्थ्य और कार्यकुशलता से गहरा संबंध है। पर्यावरण को पावन बनाए रखने में प्रकृति का विशेष महत्व है। प्रकृति का संतुलन बिगड़ा नहीं कि पर्यावरण दूषित हुआ नहीं। पर्यावरण के दूषित होते ही जीव- जगत रोग ग्रस्त हो जाता है। इसीलिए कहा गया है-यदि शुद्ध हो पर्यावरण, यदि प्रबुद्ध हो हर आचरण।भय दूर होगा रोग का, संतुलित होगा जीवन- मरण।।इस बाबत कोलकाता नगर निगम के पर्यावरण विभाग के मेयर परिषद के सदस्य राजीव देव का कहना है कि जब सभी लोग जागरूक होंगे तभी पर्यावरण का संरक्षण हो सकेगा। फिर चाहे वह किसी भी माध्यम से हो हम चाहें पौधरोपण करें, जल संरक्षण करें या फिर ऊर्जा का संरक्षण करें। इसके लिए संकल्प की आवश्यकता होगी। संकल्प भी ऐसा जिसको हम पूरा कर सकें। वार्ड नंबर 22 की पार्षद मीनादेवी पुरोहित ने कहा कि ईश्वर ने जो प्रकृति रूपी वरदान हमें दिया है। उसको हम नागरिकों ने अपनी स्वार्थपूर्ति के लिए नष्ट कर दिया। इसलिए मैं पर्यावरण को संरक्षित करने के लिए रविवार को कुछ पौधे जरूर लगाऊंगी।
शंकर जालान
रविवार को विश्व पर्यावरण दिवस है, ऐसा दिवस जो दुनिया वालोंं को याद दिलाए कि उन्हें इस धरती के पर्यावरण को सुरक्षित रखना है। उसे अधिक बिगड़ने से रोकना है, उसे इस रूप में बनाए रखना है कि आने वाली पीढ़ियां उसमें जी सकें । अगर लोग पर्यावरण के विषय पर सजक नहीं हुए तो यह दिवस अपने उद्देश्य में शायद ही सफल हो पाएगा। जब तक लोग वृक्ष को धरती का श्रृंगार नहीं समझेंगे और हरियाली से प्यार नहीं करेंगे, तब तक पर्यावरण दिवस मनाना केवल औपचारिकता भर रहेगा। एक कवि ने कहा है-वृक्ष धरा का हैं श्रंगार, इनसे करो सदा तुम प्यार।इनकी रक्षा धर्म तुम्हारा, ये हैं जीवन का आधार।।कहने को तो दुनिया भर में वैश्विक स्तर पर अनेक दिवस मनाए जाते हैं। जैसे-इंटरनेशनल वाटर डे (22 मार्च), इंटरनेशनल अर्थ डे (22 अप्रैल), वर्ल्ड नो टोबैको डे (31 मई), इंटरनेशनल पाप्युलेशन डे (11 जुलाई), वर्ल्ड पॉवर्टी इरेडिकेशन डे (17 दिसंबर), इंटरनोनल एंटीकरप्शन डे (9 दिसंबर), आदि । इन सभी दिवसों का मूल उद्देश्य विभिन्न छोटी-बड़ी समस्याओं के प्रति मानव जाति का ध्यान खींचना हैं, उनके बीच जागरूकता फैलाना है, समस्याओं के समाधान के प्रति उनके योगदान की मांग करना है, लेकिन यह साफ-साफ नहीं बताया जाता है कि लोग क्या करें और कैसे करें ।जानकारों के मुताबिक पर्यावरण शब्द के अर्थ बहुत व्यापक हैं । सड़कों और खुले भूखंडों पर आम लोगों द्वारा फेंकी जाने वाली प्लास्टिक की थैलियों की समस्या पर्यावरण से ही संबंधित है । शहरों में ही नहीं, गांवों में भी विकसित हो रहे रिहायशी इलााके पर्यावरण को प्रदूषित ही करते हैं । भूगर्भ जल का असमिति दोहन अब पेयजल की गंभीर समस्या को जन्म दे रहा है। ऐसी तमाम समस्याओं के प्रति जागरूकता फैलाने की कोशिश की जा रही है, पांच जून को वर्ष में एक बार एक दिवस मनाकर । क्या जागरूकता की बात लगातार चलने वाली प्रक्रिया नहीं होनी चाहिए? एक दिन विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए पर्यावरण दिवस मनाना क्या कुछ ऐसा ही नहीं जैसे हम किसी का जन्मदिन मनाते हैं या कोई तीज-त्योहार ? एक दिन जोरशोर से मुद्दे की चर्चा करो और फिर 364 दिन के लिए उसे भूल जाओ ? ऐसा कर हम सही अर्थों में पर्यावरण की रक्षा नहीं कर पाएंगे।पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि इन दिनों पूरी दुनिया ग्लोबल वार्मिंग जैसी जटिल समस्या से लड़ने के उपाय ढूंढ रही हैं। वहीं, आप और हम अपनी दिनचर्या में थोड़ी सी सावधानी या बदलाकर पर्यावरण को बचाने में बड़ा योगदान कर सकते। प्रदूषण न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की भयानक समस्या है। मनुष्य के आसपास जो वायुमंडल है वह पर्यावरण कहलाता है। पर्यावरण का जीवजगत के स्वास्थ्य और कार्यकुशलता से गहरा संबंध है। पर्यावरण को पावन बनाए रखने में प्रकृति का विशेष महत्व है। प्रकृति का संतुलन बिगड़ा नहीं कि पर्यावरण दूषित हुआ नहीं। पर्यावरण के दूषित होते ही जीव- जगत रोग ग्रस्त हो जाता है। इसीलिए कहा गया है-यदि शुद्ध हो पर्यावरण, यदि प्रबुद्ध हो हर आचरण।भय दूर होगा रोग का, संतुलित होगा जीवन- मरण।।इस बाबत कोलकाता नगर निगम के पर्यावरण विभाग के मेयर परिषद के सदस्य राजीव देव का कहना है कि जब सभी लोग जागरूक होंगे तभी पर्यावरण का संरक्षण हो सकेगा। फिर चाहे वह किसी भी माध्यम से हो हम चाहें पौधरोपण करें, जल संरक्षण करें या फिर ऊर्जा का संरक्षण करें। इसके लिए संकल्प की आवश्यकता होगी। संकल्प भी ऐसा जिसको हम पूरा कर सकें। वार्ड नंबर 22 की पार्षद मीनादेवी पुरोहित ने कहा कि ईश्वर ने जो प्रकृति रूपी वरदान हमें दिया है। उसको हम नागरिकों ने अपनी स्वार्थपूर्ति के लिए नष्ट कर दिया। इसलिए मैं पर्यावरण को संरक्षित करने के लिए रविवार को कुछ पौधे जरूर लगाऊंगी।
Thursday, May 26, 2011
यह जनता की जीत है - ममता बनर्जी
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने वाली और वाममोर्चा के ३४ साल के शासनकाल के ध्वस्त करने वाली तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी इस जीत को जनता की जीत मानती है। मा. माटी और मानुष के नारे के साथ चुनावी मैदान में उतरी तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी का कहना है कि सचमुच में अब बंगाल आजाद हुआ है। अभूतपूर्व जीत और बंगाल की में विकास की बयार पर रेलमंत्री व अग्निकन्या के नाम से चर्चित ममता बनर्जी से शंकर जालान ने उनके कालीघाट स्थित निवास पर बातचीत की। पेश हैं उसके संक्षित और चुनिंदा अंश-
-- इस जीत को आप किस नजर से देखती हैं?०० यह जीत जनता की जीत है या दूसरे शब्दों में कहे तो हिंसा और हत्या की राजनीति को जनता से सिरे से नकार दिया है।
-- इसे आप वाममोर्चा की हार मानती है या तृणमूल कांग्रेस की जीत?०० निसंदेह तृणमूल कांग्रेस की जीत और वाममोर्चा की सिर्फ हार नहीं बल्कि बुरी हार।
-- क्या आपको वाममोर्चा की इस हार की मुख्य वजह क्या लगती है?०० जनता के बदलाव के मूड को।
-- आपको नहीं लगता की सिंगूर और नंदीग्राम ने आपको सत्ता की चाबी पकड़ाने में मदद की होगी?०० वाममोर्चा, विशेष कर माकपा ने सिंगूर और नंदीग्राम ही क्यों, नेताई के साथ न जाने कितने जुल्म आमलोगों पर ढाए है। उसी का खामियाजा चुनाव परिणाम के रूप में उसे मिला है।
--तृणमूल कांग्रेस की अगुवाई वाली सरकार का रोडमैप क्या होगा?००सरकार का रोडमैप हम आम जनता से पूछ कर तय करेंगे।
--वाममोर्चा सरकार की कुछ नीतियों को आगे क्रियान्वित किया जाएगा या फिर सब कुछ नया होगा?००सब कुछ नया होगा, क्योंकि उनकी नीतियां ही ठीक होती तो पश्चिम बंगाल की जनता उन्हें ठुकराती क्यों? नई सरकार का कामकाज तृणमूल-कांग्रेस-एसयूसीआई गठबंधन संयुक्त रूप से तय करेगा।
--कौन होगा अगला रेल मंत्री?०० इस सवाल को जवाब के लिए १८ मई तक इंतजार करना पड़ेगा ।
--सीएम हाउस में नया बसेरा बनेगा या कालीघाट ही नया मुख्यमंत्री आवास होगा?००--उल्टे सवाल दागते हुए क्यों. आपको कालीघाट का आवास ठीक नहीं लग रहा। अभी तो यहीं हूं। बाकी बाद में देखूंगी।
-- इस जीत को आप किस नजर से देखती हैं?०० यह जीत जनता की जीत है या दूसरे शब्दों में कहे तो हिंसा और हत्या की राजनीति को जनता से सिरे से नकार दिया है।
-- इसे आप वाममोर्चा की हार मानती है या तृणमूल कांग्रेस की जीत?०० निसंदेह तृणमूल कांग्रेस की जीत और वाममोर्चा की सिर्फ हार नहीं बल्कि बुरी हार।
-- क्या आपको वाममोर्चा की इस हार की मुख्य वजह क्या लगती है?०० जनता के बदलाव के मूड को।
-- आपको नहीं लगता की सिंगूर और नंदीग्राम ने आपको सत्ता की चाबी पकड़ाने में मदद की होगी?०० वाममोर्चा, विशेष कर माकपा ने सिंगूर और नंदीग्राम ही क्यों, नेताई के साथ न जाने कितने जुल्म आमलोगों पर ढाए है। उसी का खामियाजा चुनाव परिणाम के रूप में उसे मिला है।
--तृणमूल कांग्रेस की अगुवाई वाली सरकार का रोडमैप क्या होगा?००सरकार का रोडमैप हम आम जनता से पूछ कर तय करेंगे।
--वाममोर्चा सरकार की कुछ नीतियों को आगे क्रियान्वित किया जाएगा या फिर सब कुछ नया होगा?००सब कुछ नया होगा, क्योंकि उनकी नीतियां ही ठीक होती तो पश्चिम बंगाल की जनता उन्हें ठुकराती क्यों? नई सरकार का कामकाज तृणमूल-कांग्रेस-एसयूसीआई गठबंधन संयुक्त रूप से तय करेगा।
--कौन होगा अगला रेल मंत्री?०० इस सवाल को जवाब के लिए १८ मई तक इंतजार करना पड़ेगा ।
--सीएम हाउस में नया बसेरा बनेगा या कालीघाट ही नया मुख्यमंत्री आवास होगा?००--उल्टे सवाल दागते हुए क्यों. आपको कालीघाट का आवास ठीक नहीं लग रहा। अभी तो यहीं हूं। बाकी बाद में देखूंगी।
अभी बाकी है अग्निकन्या की अग्निपरीक्षा
शंकर जालान
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने ३४ साल के वाममोर्चा शासनकालको ध्वस्त करते हुए पश्चिम बंगाल में सत्ता की चाबी हासिल कर ली है।बावजूद इसके अभी ऐसे कई मुकाम आने बाकी हैं, जिसे ममता को बेहिचक पारकरना है। कहने और सुनने में भले ही यह सहज लगे, लेकिन इसे व्यवहार मेंलाने के लिए अग्निकन्या यानी ममता बनर्जी को कई अग्निपरीक्षा देनी होगी।कहते हैं कुर्सी छोड़ना जितना आसान है. उस पर बने रहना और कही तरीके सेअपने काम को अंजाम देना उतना ही कठिन।ममता बनर्जी के सामने कई चुनौतियां हैं। मसलन राज्य में विकास की गति कोतेज करना, गोरखालैंड और जंगलमहल की समस्याओं का समाधान करना, सिंगुर केअनिच्छुक किसानों की जमीन लौटाना। हिंसा और हत्या की राजनीति का आरोपलगाकर ममता ने वाममोर्चा को सत्ता से दूर किया उस पर अंकुश लगाना। इसकेअलावा ममता ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में कोलकाता को लंदन, उत्तर बंगालको स्विजरलैंड और दीघ को गोवा बनाने की बात कही थी उस पर भी उसे खराउतरना है।राजनीतिक के जानकारों का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जीने बंगाल की महिला मुख्यमंत्री के तौर पर सत्ता तो संभाल ली है, लेकिनउनकी असली अग्निपरीक्षा अब शुरू होगी। राज्य में साढ़े तीन दशक लंबेवाममोर्चा राज को खत्म करना अबकी भले उनके लिए ज्यादा मुश्किल नहीं साबितहुआ हो, अब सरकार की मुखिया होने के बाद उनकी राह आसान नहीं होगी।वामपंथी शासन बदलने के बाद उनके कंधों पर उम्मीदों का जो भारी बोझ है,उससे ममता खुद भी अवगत हैं।चुनावी नतीजे आने और शपथ ग्रहण समारोह के दौरान एक सप्ताह के बीच राज्यके कई जिलों या यूं कहें कि तृणमूल कांग्रेस प्रभावित जिलों में कईहत्याएं और एक दर्जन से ज्यादा जगहों पर तोड़फोड़ व हंगामा हुआ है।तृणमूल समर्थकों ने कई जगहों पर कब्जा किया है और कई निर्माणों को रूकवादिया है।राजनीतिक हल्कों में चर्चा है कि सरकार का विरोध करना और सरकार चलानादोनों अलग-अलग बात है। तृणमूल कांग्रेस ने सदैव वाममोर्चा सरकार का विरोधकिया है, लेकिन अब उसे सत्ता का सुख मिला है, देखना यह है कि वह इस परकितनी खरी उतरती है।ध्यान रहे कि मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद बतौर मुख्यमंत्री पहलीबार पत्रकारों से बातचीत में ममता बनर्जी ने कहा कि- अगले तीन महीनों केभीतर गोरखालैंड व जंगलमगल की समस्या का समाधान निकाल लिया जाएगा। हुगलीजिले के सिंगुर के अनिच्छुक किसानों को ४०० एकड़ जमीन लौटा दी जाएगी।अल्पसंख्यक (मुसलमान) समुदाय के लोगों के लिए विशेष प्रावधान हेतु सच्चरकमेटी से बातचीत की जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने रात-दिन सात दिनों तकलगातार काम करने का एलान किया।ममता बनर्जी यह भली-भांति जानती हैं कि उनके सामने सामने चुनौतियों कीसूची काफी लंबी है। इनमें राज्य की कानून व व्यवस्था की स्थिति सुधारनेके अलावा कर्ज से कराहते बंगाल को इस हालत से उबारना, सरकारी कर्मचारियोंमें कार्य संस्कृति बहाल करना, उत्तर में सिर उठाते अलगाववादियों औरदक्षिण में मजबूत हो चुके माओवादियों से निपटना शामिल है। ममता की सबसेप्रमुख चुनौती राज्य में चुनावी नतीजों के बाद जारी हिंसा पर काबू पा करहालात को सामान्य बनाए रखने की है। वैसे, अपनी पार्टी के विधायकों कीपहली बैठक में ही उन्होंने साफ कर दिया था कि बदले की भावना नहीं रखनीचाहिए। उन्होंने कहा था कि लोगों ने सत्ता से बेदखल कर माकपा को उसकीगलतियों की सजा दे दी है। लेकिन बावजूद इसके राज्य में हिंसा और हथियारोंकी बरामदगी का सिलसिला जारी है। ममता यह जानती है कि राज्य की जनता बदलावके मूड में थी, इसलिए जनता ने वाममोर्चा को बहार का रास्ता दिखा दिया।ममता को यह भी मालूम है कि अगर उसके राज में हिंसा और हत्या हुई तो जनताउसे कभी माफ नहीं करेगी। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने गृहमंत्रालय फिलहाल अपने पास रखा है। ममता के करीबियों के मुताबिक ममत बहुतजल्द राज्य के पुलिस महानिदेशक, कोलकाता के पुलिस आयुक्त व उपायुक्त,विभिन्न जिलों के पुलिस अधीक्षक व जिला अधिकारियों के साथ बैठक कर आंतकरोकने की दिशा पर हर मुमकिन कदम उठाने की हिदायत देगी।राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि ममता को अब अपने व्यक्तितत्व औररवैए में भी बदलाव लाना होगा। कल तक वे प्रमुख विपक्षी पार्टी की नेता केतौर पर सत्तारुढ़ वाममोर्चा के खिलाफ आंदोलन का नारा बुलंद करती रहीं थीं।अब बदली भूमिका में उनके पास सरकार की कमान है। ऐसे में उन तमाम गलतियोंको सुधारने की जिम्मेदारी भी उनके पास आ गई है जिनके लिए वे माकपा कीअगुवाई वाली सरकार के खिलाफ आंदोलन का परचम लहराती रहती थी। वैसे, चुनावीनतीजों के बाद अपने बयानों और पार्टी के कार्यकर्ताओं को संयंम बरतने कीसलाह देकर इस बदलाव के कुछ संकेत तो उन्होंने दिए हैं। लेकिन अभी इस दिशामें काफी कुछ होना है।विपक्ष में रहते ममता दक्षिण बंगाल में माओवादियों के खिलाफ केंद्रीयसुरक्षा बलों की ओर से चलाए जा रहे साझा अभियान की धुर विरोधी रही हैं।अब सत्ता में आने के बाद उनके सामने दिनों-दिन जटिल होती जा रही माओवादकी इस समस्या से निपटने की कड़ी चुनौती है। यहां उनकी अगुवाई वाली सरकारमें कांग्रेस शामिल है और केंद्र में कांग्रेस की अगुवाई वाली सरकार मेंउनकी पार्टी यानी तृणमूल कांग्रेस। ऐसे में साझा अभियान के मुद्दे परउनका पुराना रुख दोनों दलों के बीच समस्याएं खड़ी कर सकता है।ममता ने पुलिस प्रशासन को बिना राजनीतिक हस्तक्षेप के काम करने की खुलीछूट देने की भी बात कही है। लेकिन कुछ दिनों पहले तक वे आरोप लगाती रहीथीं कि पुलिस प्रशासन का एक गुट माकपा के रंग में रंग गया है और कईअधिकारी काडर के तौर पर काम कर रहे हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वभाविकहै कि क्या वे पुलिस प्रशासन में बड़े पैमाने पर उलटफेर करते हुए उसे अपनेअनुकूल सजाएंगी या फिर सबकुछ जस का तस ही चलता रहेगा।वैसे तो चुनौतियों की यह सूची काफी लंबी है। लेकिन राज्य मेंकार्यसंस्कृति बहाल करना भी नई मुख्यमंत्री के लिए एक कड़ी चुनौती होगी।राज्य सरकारी कर्मचारियों की बड़ी तादाद माकपा से संबद्ध कोआर्डिनेशनकमिटी से जुड़ी है। पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भषचार्य ने सत्ता संभालनेके बाद डू इट नाऊ का नारा दिया था। लेकिन इन कर्मचारियों ने उनके इस नारेको दिन में ही तारे दिखा दिए थे। थक-हार कर बुद्धदेव ने भी चुप्पी साध लीथी। अब अहम सवाल यह है कि जो काम बुद्धदेव नहीं कर सके, क्या ममता वहकरने में कामयाब होगीं। चुनौतियों की सूची में कार्यसंस्कृति का स्थानभले कुछ नीचे हो, नई सरकार की तमाम योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करनेके लिहाज से तो यह अव्वल है।यहां राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि ममता प्राथमिकता के आधार परधीरे-धीरे एक-एक चुनौतियों से निपटने की पहल करेंगी। यही वजह है किउन्होंने अपने मंत्रिमंडल में समाज के विभिन्न तबके के विशेषज्ञों कोचुन-चुन कर जगह दी है। शंकर जालान
...और ममता का एक रूप यह भी
शंकर जालानजीहां, पश्चिम बंगाल की अग्नि कन्या यानी ममता बनर्जी ने केवल कला प्रेमी है बल्कि एक सफल चित्रकार भी हैं। रेल मंत्री व तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी को ज्यादातर लोग जुझारू नेता के तौर पर जानते हैं, लेकिन इन चित्रों को देख कर कोई भी सहज ही सकते में पड़ सकता है और यह मानने से पहले दांतों तले अंगुली दबा सकता है कि ये चित्र ममता बनर्जी के बनाए हुए हैं। लोग यह सोचने पर मजबूर हो सकते हैं कि आखिर इतनी व्यस्तता और भाग-दौड़ भरे राजनीतिक जीवन में ममता बनर्जी कैसे कला के लिए समय निकाल लेती हैं। इतना ही नहीं यानी कला के अलावा बनर्जी साहित्य के लिए भी वक्त बचा लेती हैं।सच मानिए संसद में जब जोरदार बहसों का दौर हो या फिर दक्षिण कोलकाता के कालीघाट स्थित उनका आवास या फिर तपसिया में बने तृणमूल कांग्रेस के मुख्यालय में बैठक हो रही हो या चर्चा। ममता बनर्जी थोड़ा समय निकाल कर पेंटिंग्स कर लेती हैं और कविताएं भी लिख लेती हैं।आप ने ठीक समझा हम यहां उसी ममता बनर्जी की बात कर रहे हैं जो पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में परिवर्तन का प्रतीक बनी हुई है। इन्हीं ममता बनर्जी की बनाई गई १०१ पेंटिंग्स की प्रदर्शनी शेक्सपियर सरणी स्थित गैलरी-८८ में लगाई गई। तीन दिनों तक चलने वाली प्रदर्शनी का उद्घाटन चार अप्रैल को हुआ, लेकिन लोगों की भीड़ को देखते हुए प्रदर्शनी एक दिन और बढ़ा दी गई। हालांकि १०१ चित्रों की प्रदर्शनी में बिक्री के लिए ९८ चित्र ही है और बुधवार शाम तक इनमें से आधे से अधिक चित्र बिक चुके थे। इसके एवज में लगभग डेढ़ करोड़ रुपए एकत्रित किए जा चुके थे।प्रदर्शनी की खास बात यह है कि पहले ही दिन से यहां कला प्रेमियों का न केवल आगमन शुरू हो गया था, बल्कि १४ पेटिंग्स को खरीदार भी मिल गए थे। दूसरे दिन भी १४ और तीसरे दिन १५ से ज्यादा पेंटिंग्स को कला प्रेमियों ने खरीदा।इस प्रदर्शनी में हर रंग और मिजाज को ध्यान में रख कर बनाए गए चित्रों को रखा गया है। ममता के करीबियों के मुताबिक ममता ने इन चित्रों को व्यस्त दिनचर्या के बीच फुरसत में बनाया है। इन चित्रों में जंगल महल, द रिदम आफ लाइफ, द डाउन, अनसीन ड्रीम, फेडेड ब्यूटी व विंड इन ब्लू शामिल हैं।प्रदर्शनी में इन चित्रों को देखने के दौरान कला के जानकर बातचीत भी कर रहे थे और लगभग हर कोई ममता की पेंटिंग्स की तारीफ कर रहा था। कला के इन मुरीदों में मशहूर कलाकार से लेकर आम लोग मुग्ध होकर दीदी (ममता बनर्जी) के चित्रों की प्रशंसा में व्यस्त दिखे। ममता की पेंटिंग्स में उनके बहुचर्चित नारे मां-माटी-मानुष से लेकर जीवन और समाज के विविध रंग भरे हैं। सूत्रों के मुताबिक बिक्री से प्राप्त राशि का उपयोग पार्टी के सांगठनिक कार्यों में किया जाएगा। इसके साथ ही इन पैसों से गरीब व असहायों की मदद की जाएगी।पेटिंग्स की तारीफ करते हुए कोलकाता के मेयर शोभन चटर्जी कहते हैं - ममता छात्र राजनीति के समय से ही किसानों के आंदोलन से जुड़ी थी। प्रकृति के प्रति प्रेम उनमें बचपन से था। उनकी बनाई पेटिंग्स प्रेरणादायक है। कमोबेश यह बात विधानसभा में विरोधी दल के नेता पार्थ चटर्जी में कहते हैं।पेंटिंग्स खरीदने वालों में हर्ष नेवटिया, जगमोहन डालमिया, हरनाथ चक्रवर्ती, रंजीत मल्लिक, जय मेहता समेत कई जाने माने लोग व उद्योगपित शामिल है। वहीं, देखने वाले संजीव गोयनका, आरएस अग्रवाल, आरएस गोयनका, मेघनाथ राय, संदीप भूतोडि़या, जय गोस्वामी, कावेरी गोस्वामी शामिल थे। इन लोगों ने कहा- आंखों को आकर्षित करते हैं चित्रों के रंग। इनमें तुली (ब्रश) की साहसिकता उभर कर आई है। इन चित्रों में गंभीर शांति के भाव छिपे हैं।मालूम हो कि इस प्रदर्शनी का आयोजन तृणमूल कांग्रेस के मुखपत्र जागों बांग्ला की ओर से किया गया। इसमें दो युवा कला प्रेमी सृंजय बोस और शिवाजी पांजा का विशेष सहयोग रहा है। ममता के चित्रों की पहली प्रदर्शनी २००५ में लगी थी, जिसके मार्फत चार लाख रुपए जुट पाए थे और दूसरी प्रदर्शनी २००७ में लगी थी और १४ लाख रुपए एकत्रित किए गए थे।शंकर जालान
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