शंकर जालान
आजकल उत्तर बंगाल के चाय उद्योग पर मजदूरी आंदोलन के चलते संकट के बादल मंडराने लगे हैं। विभिन्न चाय श्रमिकों के संगठनों के आंदोलन के चलते बागानों के मालिक भारी दबाव में हैं। आंदोलन का नेतृत्व दे रहे को-आर्डिनेशन कमेटी के संयोजक चित्त दे के मुताबिक उत्तर बंगाल के तराइ, डुवार्स और दार्जिलिंग के पार्वतीय क्षेत्र में बड़े चाय बागानों की संख्या 2788 है। इनके अलावा कूचबिहार, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर जिलों में लघु चाय बागानों की अच्छी खासी तादाद है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में मजदूरों को मिल रही 67 रुपए की दैनिक मजदूरी महंगाई को देखते हुए नगण्य है। हमने इसे 165 रुपए करने की मांग की है। लेकिन मालिक अपनी जिद पर अड़े हुए हैं। सीटू नेता जियाउर आलम ने कहा कि मालिक पक्ष मजदूरों का शोषण कर करोड़ों रुपए का मुनाफा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार भी इस तरफ ध्यान नहीं दे रही है, जबकि उसे इस मसले पर गंभीरता से सोचना चाहिए।
मालूम हो कि तराई-डुवार्स में लगभग दो लाख 22 हजार चाय श्रमिक प्रत्यक्ष रूप से चाय उद्योग से जुड़े हैं। इस बीच, मजदूर नेता अलोक चक्रवर्ती ने कहा है कि मालिक पक्ष के साथ मजदूरी को लेकर श्रमिक संगठनों की कई बार बैठकें हुई है, लेकिन कोई सार्थक नतीजा नहीं निकला। यदि मजदूरों की मांग नहीं मानी गई तो हम वृहद आंदोलन करेंगे। इस प्रसंग में चाय बागानों के संगठन के संयोजक अमितांशु चक्रवर्ती ने कहा कि दरअसल लोग केवल 67 रुपए मजदूरी को ही देख रहे हैं। इस राशि के अलावा मजदूरों को जो सुविधाएं दी रही हैं उसे नजरअंदाज किया जाता है। मिसाल के तौर पर मजदूरों को आवास व रियायती मूल्य पर राशन दिया जा रहा है। उसे मजदूरी में शामिल नहीं किया जाता। इनके साथ ही मजदूरों के नि:शुल्क इलाज की व्यवस्था की गई है। कुल मिलाकर 135 रुपए का हिसाब आता है। जब मालिक पक्ष पर करोड़ों रुपए का मुनाफा करने का आरोप लगता है तो नेता लोग भूल जाते हैं कि महंगाई की मार जितनी आम जनता को झेलनी पड़ रही है उतनी ही चाय बागान मालिकों को भी। महंगाई के चलते उत्पादन की लागत दोगुनी हो गई है। इसलिए हमने तीन वर्ष में आठ रुपए की दर से मजदूरी बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। फिलहाल हड़ताल की वजह से हमें भारी नुकसान उठाना पड़ा है। एक चाय बागान में प्रतिदिन आठ हजार से दस हजार किलो चायपत्ती का उत्पादन होता है। इसका मूल्य नौ से दस लाख रुपए होता है। डुवार्स में 154, तराई में 46 और दार्जिलिंग में 78 वृहद चाय बागान हैं। हड़ताल के कारण चाय बागानों के मालिकों को करोड़ों का चूना लगा है।
उनका तर्क है कि चाय श्रमिकों की मजदूरी एक ही बार में अधिक बढ़ाना उद्योग के लिए संभव नहीं है। उत्तर बंगाल में लघु चाय बागान करीब तीस हजार हैं, जिनमें प्रतिदिन 91 मिलियन किलो का उत्पादन होता है। करीब एक लाख एकड़ जमीन में फैले इन लघु चाय बागानों में प्रति वर्ष नौ करोड़ दस लाख किलो चायपत्ती का उत्पादन होता है। आंदोलन के प्रसंग में मजदूर संगठन से जुड़े एक अन्य नेता सुकरा मुंडा ने कहा कि 250 रुपए मजदूरी की मांग नहीं माने जाने पर हम वृहद आंदोलन के लिए तैयार हैं। यदि मालिक पक्ष को हड़ताल से नुकसान होता है तो हम इसके लिए जिम्मेदार नहीं हैं।
उनका कहा कि मजदूरों के साथ हुए समझौते के मुताबिक न्यूनतम मजदूरी के तहत रियायती दर पर राशन, पेयजल की आपूर्ति, स्वास्थ्य सेवा, जलावन और इन सब का रखरखाव भी शामिल है, लेकिन जमीनी स्तर पर देखा जाता है कि यह व्यवस्था भी इतनी लचर है, जिसे शब्दों में बांधना मुश्किल है। पंद्रह दिनों की दिहाड़ी में से श्रमिकों को 67 रुपए की दर से केवल 12 रोज की ही मजदूरी दी जाती है। यह राशि 804 रुपए होती है। अब इसी राशि में मजदूर को अपना व अपनी बीवी व बच्चों का पेट पालने से लेकर उनकी शिक्षा पर खर्च करना पड़ता है। इसी में उसे दवा का खर्च भी उठाना पड़ता है, चूंकि बागान के अस्पताल में दवाएं बहुत कम ही रहती हैं। ज्यादातर दवाएं बाहर से ही खरीदनी पड़ती है।
इस दौर में मजूदरों का केवल एक ही सहारा होता है जब बागान में पत्ती की भरमार होती है। उस दौर में चायपत्ती तोड़ने के लिए उन्हें अतिरिक्त पैसे मिलते हैं। इस अतिरिक्त कार्य के लिए भी मजदूरी निर्धारित है। प्रथम छह किलो तक एक रुपए प्रति किलो और उससे अधिक तोड़ने पर डेढ़ रुपए प्रति किलो की दर से मजदूरी मिलती है। यह कार्य वर्ष में तीन से चार महीने ही रहता है, बाकी महीनों में मजदूर गृहस्थी की गाड़ी खींचने के लिए अपना बोनस, ग्रैच्यूटी, पीएफ तक महाजनों के पास गिरवी रख देते हैं। मजदूर की पूरी जिंदगी कर्ज में डूबी रहती है। इस बीच यदि वह किसी गंभीर रोग का शिकार हो जाता है तो उसके लिए धीमी मौत का इंतजार करने के सिवा अन्य कोई विकल्प नहीं रह जाता। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस राशन की दुहाई प्रबंधन देता है उसमें भी कई तरह की खामियां हैं। बागान श्रमिकों को 40 पैसे प्रति किलो की दर से चावल, गेहूं या आटा दिया जाता है। एक मजदूर को सप्ताह में एक किलो चावल, दो किलो 220 ग्राम गेहूं या आटा और पत्नी के लिए एक किलो चावल, एक किलो 440 ग्राम आटा, बच्चों के लिए 500 ग्राम चावल और 720 ग्राम आटा मिलता है। यह व्यवस्था भी बहुत से बागानों से में लचर है। आए दिन राशन को लेकर मजदूरों और प्रबंधन के बीच विवाद होता रहता है। पेयजल की आपूर्ति व्यवस्था भी सही नहीं है। कई जगह पाइप साठ से सत्तर साल पुराने हो चुके हैं। रोज पाइप की मरम्मत होती है और रोज टूटते हैं। बागानों में आज भी कच्चे कुएं का पानी प्रयोग में लाया जाता है। कहीं तो नदियों का पानी परिष्कृत किए बिना सीधे आवासों में पहुंचाया जाता है। मजदूरों की आवासीय सुविधा का हाल भी बेहाल है। एक आवासीय घर नियमानुसार 350 वर्ग फीट का होना चाहिए। हालांकि कई जगह ये घर 21 बटा 10 फीट के ही हैं। जबकि बहुत से मजदूरों को यह भी नसीब नहीं है। आवास को लेकर बागान में विवाद कोई नई बात नहीं है। घरों के टूटी हुई छत, टूटी हुई खिड़कियां ही सबकुछ बयान कर देती हैं। मजदूरों को आश्वासन की घुट्टी पिला दी जाती है।
शशि थापा नामक एक महिला मजदूर ने शुक्रवार को बताया कि कम मजदूरी की समस्या से पहले से जूझ रहे चाय मजदूरों के सामने एक नया संकट आ गया है। वह है भविष्य में छंटनी का संकट। इसकी मुख्य वजह है वह मशीन जिससे चायपत्तियां तोड़ने का काम लिया जा रहा है। आम तौर पर श्रमिकों और श्रमिक संगठन के नेताओं का मानना है कि इस मशीन का उपयोग उत्तर बंगाल के इस सबसे वृहद उद्योग मजदूरों की छंटनी के लिए किया जा सकता है। हालांकि चाय बागान मालिक इस परिवर्तन को सकारात्मक नजरिए से देखते हैं।
मालिकों का कहना है कि मशीन का उपयोग श्रम दक्षता को बढ़ाने के लिए किया जा रहा है। श्रमिक छंटनी की आशंका बेबुनियाद है। ज्ञात हो कि एक श्रमिक दिन में जितनी पत्तियां तोड़ते हैं उससे यह मशीन बहुत की कम समय में दोगुणी चायपत्ती तोड़ने में सक्षम है। 18 श्रमिक संगठनों की को-आर्डिनेशन कमेटी के संयोजक चित्त दे का कहना है कि हालांकि शुरू में ऐसा लगता था कि यह मशीन श्रमिक की मदद कर रही है लेकिन अब मजदूरों को इससे नुकसान की आशंका सताने लगी है। इसका कुफल श्रमिक छंटनी के रूप में हमारे सामने आ सकता है। खासतौर से महिला श्रमिकों की शिकायत है कि उन्हें इस मशीन के जरिए काम करने में असुविधा हो रही है।
Sunday, September 25, 2011
सर्व धर्म समभाव की थीम पर संतोष मित्र स्क्वायर दुर्गापूजा
शंकर जालान
कोलकाता। बीते 10-12 सालों से बेहतरीन पंडाल बनाने और कई पुरस्कार जीतने वाली संतोष मित्र स्क्वायर सार्वजनीन दुर्गोत्सव समिति इस बार सर्वधर्म समभाव पर दुर्गापूजा आयोजित कर रही है। समिति के प्रमुख प्रदीप घोष ने बताया कि बीते साल यानी 2010 में राइटर्स बिल्डिंग की तर्ज पर पूजा पंडाल बनाया गया था और इससे पहले 2009 में अमेरिका स्थित स्टेचू आॅफ लिबर्टी की आकृति का पंडाल बनाया गया था।
उन्होंने बताया कि इस साल मदन डेकोरेटर्स के सैकड़ों कारीगर इस बार सर्व धर्म समभाव पर पूजा पंडाल बना रहे हैं वहीं बिजली सज्जा देवाशीष इलेक्ट्रिक और प्रतिमा बनाने का काम मोहनवासी रुद्रपाल कर रहे हैं। घोष ने बताया कि पानी का जहाज, बिलासपुर ट्रेन हादसा, कारगिल युद्ध, अक्षरधाम मंदिर, संतोषपुर सड़क दुर्घटना, नैनो कारखाना समेत देश-दुनिया की कई प्रमुख घटनाओं को पंडाल का आकार दिया गया है। उन्होंने बताया कि संतोष मित्र स्क्वायर के पूजा पंडाल का उद्घाटन 30 सितंबर को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल एमके नारायणन के हाथों होगा। इस मौके पर सांसद दीपा दासमुंशी, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रदीप भट््टाचार्य समेत कई जाने माने लोग बतौर अतिथि मौजूद रहेंगे।
घोष ने बताया कि बड़े बजट की पूजा को साकार रूप देने में डेकोरेटर के एक सौ से ज्यादा करीगर बीते तीन महीने से पंडाल निर्माण में जुटे हैं। उन्होंने बताया कि इस बार 120 फीट चौड़ा, 135 फीट लंबा और 90 फीट ऊंचा पंडाल बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पंडाल निर्माण में प्लाईवुड, लकड़ी, कपड़ा और थर्माकोल का इस्तेमाल किया जा रहा है।
उनके मुताबिक पूजा पंडाल में आए लोगों के सर्व धर्म समभाव का संदेश लोगों को मिलेगा ही। साथ ही विकास, सौंदर्यीकरण और हरियाली के महत्व को भी समझ पाएंगे। घोष ने बताया कि समिति के बैनर तले 1936 से पूजा आयोजित होती आ रही है, लेकिन पिछले 10-12 सालों से यहां की पूजा ने जो ख्याति अर्जित की है उसका बयान शब्दों में नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि संतोष मित्र स्क्वायर में जितने लोग पूजा देखने आते हैं उतने लोग शायद अन्यत्र नहीं जाते होंगे। यहां के बेकाबू भीड़ को देखते हुए प्रशासन को कई बार रैफ (रेपिड एक्शन फोर्स) तैनात करनी पड़ी है।
घोष ने बताया कि पानी के जहाज के शक्ल वाले पंडाल तो इतना चर्चित हुआ था कि विसर्जन के कई सप्ताह बाद तक लोग पंडाल देखने आते रहे। उसके बाद से समिति ने हर साल एक विशेष थीम को ध्यान में रखकर दर्शनीय व भव्य पंडाल बनाने का बीड़ा उठाया। घोष ने बताया कि इस बार भी प्रतिमा तो परंपरागत ही रहेगी, लेकिन हमारे पंडाल में रखी मूर्ति मूर्तिकार की अद्भुत कल्पना की परिचायक होगी।
बिजली सज्जा के बारे में उन्होंने बताया कि देवाशीष इलेक्ट्रिक के लोग इंद्रधनुषी रोशनी बिखेरने में सक्रिय रूप से लगे हैं। बिजली सज्जा के लिए कोई थीम तो नहीं निर्धारित की गई है, लेकिन जरूर हैं कि देखने वाले को स्तरीय लगेगी। उनके मुताबिक सात अक्तूबर को प्रतिमा का विसर्जन किया जाएगा। इससे पहले पूजा पंडाल में सिंदूर खेला का आयोजन होगा।
कोलकाता। बीते 10-12 सालों से बेहतरीन पंडाल बनाने और कई पुरस्कार जीतने वाली संतोष मित्र स्क्वायर सार्वजनीन दुर्गोत्सव समिति इस बार सर्वधर्म समभाव पर दुर्गापूजा आयोजित कर रही है। समिति के प्रमुख प्रदीप घोष ने बताया कि बीते साल यानी 2010 में राइटर्स बिल्डिंग की तर्ज पर पूजा पंडाल बनाया गया था और इससे पहले 2009 में अमेरिका स्थित स्टेचू आॅफ लिबर्टी की आकृति का पंडाल बनाया गया था।
उन्होंने बताया कि इस साल मदन डेकोरेटर्स के सैकड़ों कारीगर इस बार सर्व धर्म समभाव पर पूजा पंडाल बना रहे हैं वहीं बिजली सज्जा देवाशीष इलेक्ट्रिक और प्रतिमा बनाने का काम मोहनवासी रुद्रपाल कर रहे हैं। घोष ने बताया कि पानी का जहाज, बिलासपुर ट्रेन हादसा, कारगिल युद्ध, अक्षरधाम मंदिर, संतोषपुर सड़क दुर्घटना, नैनो कारखाना समेत देश-दुनिया की कई प्रमुख घटनाओं को पंडाल का आकार दिया गया है। उन्होंने बताया कि संतोष मित्र स्क्वायर के पूजा पंडाल का उद्घाटन 30 सितंबर को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल एमके नारायणन के हाथों होगा। इस मौके पर सांसद दीपा दासमुंशी, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रदीप भट््टाचार्य समेत कई जाने माने लोग बतौर अतिथि मौजूद रहेंगे।
घोष ने बताया कि बड़े बजट की पूजा को साकार रूप देने में डेकोरेटर के एक सौ से ज्यादा करीगर बीते तीन महीने से पंडाल निर्माण में जुटे हैं। उन्होंने बताया कि इस बार 120 फीट चौड़ा, 135 फीट लंबा और 90 फीट ऊंचा पंडाल बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पंडाल निर्माण में प्लाईवुड, लकड़ी, कपड़ा और थर्माकोल का इस्तेमाल किया जा रहा है।
उनके मुताबिक पूजा पंडाल में आए लोगों के सर्व धर्म समभाव का संदेश लोगों को मिलेगा ही। साथ ही विकास, सौंदर्यीकरण और हरियाली के महत्व को भी समझ पाएंगे। घोष ने बताया कि समिति के बैनर तले 1936 से पूजा आयोजित होती आ रही है, लेकिन पिछले 10-12 सालों से यहां की पूजा ने जो ख्याति अर्जित की है उसका बयान शब्दों में नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि संतोष मित्र स्क्वायर में जितने लोग पूजा देखने आते हैं उतने लोग शायद अन्यत्र नहीं जाते होंगे। यहां के बेकाबू भीड़ को देखते हुए प्रशासन को कई बार रैफ (रेपिड एक्शन फोर्स) तैनात करनी पड़ी है।
घोष ने बताया कि पानी के जहाज के शक्ल वाले पंडाल तो इतना चर्चित हुआ था कि विसर्जन के कई सप्ताह बाद तक लोग पंडाल देखने आते रहे। उसके बाद से समिति ने हर साल एक विशेष थीम को ध्यान में रखकर दर्शनीय व भव्य पंडाल बनाने का बीड़ा उठाया। घोष ने बताया कि इस बार भी प्रतिमा तो परंपरागत ही रहेगी, लेकिन हमारे पंडाल में रखी मूर्ति मूर्तिकार की अद्भुत कल्पना की परिचायक होगी।
बिजली सज्जा के बारे में उन्होंने बताया कि देवाशीष इलेक्ट्रिक के लोग इंद्रधनुषी रोशनी बिखेरने में सक्रिय रूप से लगे हैं। बिजली सज्जा के लिए कोई थीम तो नहीं निर्धारित की गई है, लेकिन जरूर हैं कि देखने वाले को स्तरीय लगेगी। उनके मुताबिक सात अक्तूबर को प्रतिमा का विसर्जन किया जाएगा। इससे पहले पूजा पंडाल में सिंदूर खेला का आयोजन होगा।
Saturday, September 24, 2011
पर्यावरण, शिक्षा, भ्रष्टाचार और नारी सशक्तिकरण पर आधारित बिजली सज्जा
शंकर जालान
कोलकाता, अगले महीने के पहले सप्ताह से आयोजित होने वाले दुर्गोत्सव में इस बार पंडाल, प्रतिमा के साथ-साथ बिजली सज्जा भी विशेष थीम पर आधारित होगी। हुगली जिले के चंदननगर के हजारों कारीगर इनदिनों दर्जनों पूजा कमिटियों के लिए बिजली सज्जा को अंतिम रूप देने में व्यस्त हैं। इन कारीगरों ने बताया कि इस साल ज्यादातर पूजा आयोजक पर्यावरण, शिक्षा, भ्रष्टाचार और नारी सशक्तिकरण पर आधारित बिजली सज्जा की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा कुछ समितियां रवींद्रनाथ टैगोर, भारतीय क्रिकेट दल और जानी-मानी फिल्म हस्तियों को भी रोशनी के माध्यम से दर्शाएंगी।
चंदननगर के कारीगर 32 वर्षीय रवींद्र कुमार ने बताया कि वे दक्षिण कोलकाता की तीन पूजा पंडालों के लिए बिजली सज्जा का काम कर रहे हैं। उनके मुताबिक बालीगंज स्थित एक पूजा कमिटी के लिए वे पर्यावरण की थीम पर बिजली सज्जा कर रहे हैं। इसके अलावा एक दूसरी पूजा कमिटी के फलों पर केंद्रीत विद्युत सज्जा कर रहे हैं। साथ ही एक अन्य पूजा पंडाल के लिए सामान्य लिए तौर पर रोशनी की व्यवस्था कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि बालीगंज के पूजा पंडाल के लिए वे हरियाली के महत्व व पर्यावरण के मद्देनजर बिज्जी सज्जा कर रहे हैं। उनके मुताबिक सड़क के दोनों तरह हरियाली के प्रतीक के रूप में हरे रंग के बल्ब लगाए जा रहे हैं। वहीं ट्यूनिंग लाइट के जरिए पेड़ काटने, तालाब पाटने के कुप्रभाव को दिखाया जाएगा।
मध्य कोलकाता के मोहम्मद अली पार्क स्थित यूथ एसोसिएशन के पूजा पंडाल में रोशनी के जरिए नारी के विविध रूपों को दर्शाया जाएगा। एसोसिएशन के महासचिव विनोद शर्मा ने बताया कि बिजली सज्जा के सहारे वे लोग बेटी, बहन, पत्नी और मां के अलावा नारी की विविध रूप व शक्ति को दिखाएंगे।
वहीं, उत्तर कोलकाता के काशीपुर स्थित बीबी बाजार इलाके में शिक्षा, काशी बोस लेन में भ्रष्टाचार, कुम्हारटोली पार्क में नारी सशक्तिकरण पर बिजली सज्जा की जा रही है। साल्टलेक के सीएलसीके ब्लॉक में इस बार रवींद्रनाथ टैगोर और करुणामयी इलाके में भारतीय क्रिकेट दल पर आधारित बिजली सज्जा की जा रही है।
मध्य कोलकाता के एक पूजा पंडाल के लिए बिजली सज्जा की तैयारी में जुटे एक कारीगर ने बताया कि वे दुर्गापूजा के तीन-चार महीने पहले से ही विभिन्न थीमों की रूपरेखा तैयार कर लेते हैं। इसके बाद आयोजकों से संपर्क उसमें कुछ फेर-बदल कर एक तय राशि पर बिजली सज्जा का ठेका ले लेते हैं। उन्होंने बताया कि आयोजक इस शर्त के साथ अग्रिम भुगतान करते हैं कि इस थीम की बिजली सज्जा अन्य पूजा पंडालों में नहीं हो चाहिए।
कोलकाता, अगले महीने के पहले सप्ताह से आयोजित होने वाले दुर्गोत्सव में इस बार पंडाल, प्रतिमा के साथ-साथ बिजली सज्जा भी विशेष थीम पर आधारित होगी। हुगली जिले के चंदननगर के हजारों कारीगर इनदिनों दर्जनों पूजा कमिटियों के लिए बिजली सज्जा को अंतिम रूप देने में व्यस्त हैं। इन कारीगरों ने बताया कि इस साल ज्यादातर पूजा आयोजक पर्यावरण, शिक्षा, भ्रष्टाचार और नारी सशक्तिकरण पर आधारित बिजली सज्जा की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा कुछ समितियां रवींद्रनाथ टैगोर, भारतीय क्रिकेट दल और जानी-मानी फिल्म हस्तियों को भी रोशनी के माध्यम से दर्शाएंगी।
चंदननगर के कारीगर 32 वर्षीय रवींद्र कुमार ने बताया कि वे दक्षिण कोलकाता की तीन पूजा पंडालों के लिए बिजली सज्जा का काम कर रहे हैं। उनके मुताबिक बालीगंज स्थित एक पूजा कमिटी के लिए वे पर्यावरण की थीम पर बिजली सज्जा कर रहे हैं। इसके अलावा एक दूसरी पूजा कमिटी के फलों पर केंद्रीत विद्युत सज्जा कर रहे हैं। साथ ही एक अन्य पूजा पंडाल के लिए सामान्य लिए तौर पर रोशनी की व्यवस्था कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि बालीगंज के पूजा पंडाल के लिए वे हरियाली के महत्व व पर्यावरण के मद्देनजर बिज्जी सज्जा कर रहे हैं। उनके मुताबिक सड़क के दोनों तरह हरियाली के प्रतीक के रूप में हरे रंग के बल्ब लगाए जा रहे हैं। वहीं ट्यूनिंग लाइट के जरिए पेड़ काटने, तालाब पाटने के कुप्रभाव को दिखाया जाएगा।
मध्य कोलकाता के मोहम्मद अली पार्क स्थित यूथ एसोसिएशन के पूजा पंडाल में रोशनी के जरिए नारी के विविध रूपों को दर्शाया जाएगा। एसोसिएशन के महासचिव विनोद शर्मा ने बताया कि बिजली सज्जा के सहारे वे लोग बेटी, बहन, पत्नी और मां के अलावा नारी की विविध रूप व शक्ति को दिखाएंगे।
वहीं, उत्तर कोलकाता के काशीपुर स्थित बीबी बाजार इलाके में शिक्षा, काशी बोस लेन में भ्रष्टाचार, कुम्हारटोली पार्क में नारी सशक्तिकरण पर बिजली सज्जा की जा रही है। साल्टलेक के सीएलसीके ब्लॉक में इस बार रवींद्रनाथ टैगोर और करुणामयी इलाके में भारतीय क्रिकेट दल पर आधारित बिजली सज्जा की जा रही है।
मध्य कोलकाता के एक पूजा पंडाल के लिए बिजली सज्जा की तैयारी में जुटे एक कारीगर ने बताया कि वे दुर्गापूजा के तीन-चार महीने पहले से ही विभिन्न थीमों की रूपरेखा तैयार कर लेते हैं। इसके बाद आयोजकों से संपर्क उसमें कुछ फेर-बदल कर एक तय राशि पर बिजली सज्जा का ठेका ले लेते हैं। उन्होंने बताया कि आयोजक इस शर्त के साथ अग्रिम भुगतान करते हैं कि इस थीम की बिजली सज्जा अन्य पूजा पंडालों में नहीं हो चाहिए।
Sunday, September 18, 2011
मोहम्मद अली पार्क में दिखेंगे नारी के विविध रूप
शंकर जालान
कोलकाता। महानगर की चर्चित दुर्गापूजा यूथ एसोसिएशन (मोहम्मद अली पार्क) में इस बार पूजा घूमने आए दर्शकों को नारी या शक्ति का विविध रूप दिखेंगे। बीते साल यानी 2010 में थाईलैंड का बौद्ध मंदिर, 2009 में पर्यावरण के महत्व, 2008 में आतंकवाद के खतरे, 2007 में कन्या भ्रूण हत्या, 2006 में नारी शक्ति और 2005 में विज्ञान का तरक्की यानी सेटेलाइट की थीम पर यूथ एसोसिएशन ने दुर्गापूजा आयोजित कर न केवल वाहवाही लूटी थी, बल्कि कई पुरस्कार भी हासिल किए थे।
एसोसिएशन के कार्यकारी अध्यक्ष रमेश लखोटिया और प्रधान सचिव विनोद शर्मा ने बताया कि नदिया जिले के जागुलिया के कार्तिक सेन नारी के विविध रूपों के अनुसार पंडाल और प्रतिमा बनाने में जुटे हैं। वहीं, बिजली सज्जा का काम विनस इलेक्ट्रिक को दिया जाएगा। आयोजकों ने बताया कि इस बार की बिजली सज्जा नारी के विविध रूपों पर रोशनी डालने के साथ-साथ देखने लायक होगी।
लखोटिया ने बताया कि दुर्गोत्सव के बहाने एसोसिएशन का उद्देश्य रहता है कि पूजा देखने आए लोग जाते वक्त मां के प्रसाद कुछ नसीयत भी लेते जाएं। उन्होंने बताया कि इसके मद्देनजर बीते कुछ सालों में पर्यावरण, आतंकवाद, कन्या भ्रूण हत्या, नारी शक्ति और सेटेलाइट की थीम पर देवी दुर्गा समेत गणेश, कार्तिक, लक्ष्मी और सरस्वती का आराधना की गई थी।
बजट, उद्घाटन और विसर्जन बाबत पूछे गए सवाल के जवाब में कार्यकारी अध्यक्ष ने बताया कि बजट करीब 22-23 लाख का है। पूजा पंडाल का उद्घाटन 30 सितंबर को और विसर्जन आठ अक्तूबर को होगा। उद्घाटन कौन करेगा? इसका उत्तर देते हुए लखोटिया ने बताया कि राज्यपाल एमके नारायणन व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से संपर्क साधा जा रहा है। फिलहाल कोई स्वीकृति नहीं मिली है। उन्होंने बताया कि 1969 से एसोसिएशन के बैनर तले पूजा आयोजित होती आ रही है। 1976 तक पूजा ताराचंद दत्त स्ट्रीट में होती थी, लेकिन अत्याधिक भीड़ व कई घंटों तक यातायात प्रभावित रहने के कारण कोलकाता पुलिस व कोलकाता नगर निगम की सलाह पर 1977 से दुर्गापूजा मोहम्मद अली पार्क में आयोजित की जाने लगी।
उन्होंने बताया कि थीम के मुताबिक पंडाल को सजाने, संवारने और अंतिम रूप देने में सैंकड़ों कारीगर लगे हैं। थर्माकोल, कपड़ा, प्लाईवुड, प्लास्टर आॅफ पेरिस और मिट््टी से नारी के विविध रूपों को अंकित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यह पूजा आयोजन का 43वां वर्ष है। एसोसिएशन के पूजा पंडाल में आने वाले दर्शकों को कहीं गर्भ में पल रहे बच्चे की हत्या करवाती नारी, कहीं गर्म तेल में जलती नारी तो कहीं अबला और कहीं सबला के रूप में नारी को देख पाएंगे।
कोलकाता। महानगर की चर्चित दुर्गापूजा यूथ एसोसिएशन (मोहम्मद अली पार्क) में इस बार पूजा घूमने आए दर्शकों को नारी या शक्ति का विविध रूप दिखेंगे। बीते साल यानी 2010 में थाईलैंड का बौद्ध मंदिर, 2009 में पर्यावरण के महत्व, 2008 में आतंकवाद के खतरे, 2007 में कन्या भ्रूण हत्या, 2006 में नारी शक्ति और 2005 में विज्ञान का तरक्की यानी सेटेलाइट की थीम पर यूथ एसोसिएशन ने दुर्गापूजा आयोजित कर न केवल वाहवाही लूटी थी, बल्कि कई पुरस्कार भी हासिल किए थे।
एसोसिएशन के कार्यकारी अध्यक्ष रमेश लखोटिया और प्रधान सचिव विनोद शर्मा ने बताया कि नदिया जिले के जागुलिया के कार्तिक सेन नारी के विविध रूपों के अनुसार पंडाल और प्रतिमा बनाने में जुटे हैं। वहीं, बिजली सज्जा का काम विनस इलेक्ट्रिक को दिया जाएगा। आयोजकों ने बताया कि इस बार की बिजली सज्जा नारी के विविध रूपों पर रोशनी डालने के साथ-साथ देखने लायक होगी।
लखोटिया ने बताया कि दुर्गोत्सव के बहाने एसोसिएशन का उद्देश्य रहता है कि पूजा देखने आए लोग जाते वक्त मां के प्रसाद कुछ नसीयत भी लेते जाएं। उन्होंने बताया कि इसके मद्देनजर बीते कुछ सालों में पर्यावरण, आतंकवाद, कन्या भ्रूण हत्या, नारी शक्ति और सेटेलाइट की थीम पर देवी दुर्गा समेत गणेश, कार्तिक, लक्ष्मी और सरस्वती का आराधना की गई थी।
बजट, उद्घाटन और विसर्जन बाबत पूछे गए सवाल के जवाब में कार्यकारी अध्यक्ष ने बताया कि बजट करीब 22-23 लाख का है। पूजा पंडाल का उद्घाटन 30 सितंबर को और विसर्जन आठ अक्तूबर को होगा। उद्घाटन कौन करेगा? इसका उत्तर देते हुए लखोटिया ने बताया कि राज्यपाल एमके नारायणन व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से संपर्क साधा जा रहा है। फिलहाल कोई स्वीकृति नहीं मिली है। उन्होंने बताया कि 1969 से एसोसिएशन के बैनर तले पूजा आयोजित होती आ रही है। 1976 तक पूजा ताराचंद दत्त स्ट्रीट में होती थी, लेकिन अत्याधिक भीड़ व कई घंटों तक यातायात प्रभावित रहने के कारण कोलकाता पुलिस व कोलकाता नगर निगम की सलाह पर 1977 से दुर्गापूजा मोहम्मद अली पार्क में आयोजित की जाने लगी।
उन्होंने बताया कि थीम के मुताबिक पंडाल को सजाने, संवारने और अंतिम रूप देने में सैंकड़ों कारीगर लगे हैं। थर्माकोल, कपड़ा, प्लाईवुड, प्लास्टर आॅफ पेरिस और मिट््टी से नारी के विविध रूपों को अंकित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यह पूजा आयोजन का 43वां वर्ष है। एसोसिएशन के पूजा पंडाल में आने वाले दर्शकों को कहीं गर्भ में पल रहे बच्चे की हत्या करवाती नारी, कहीं गर्म तेल में जलती नारी तो कहीं अबला और कहीं सबला के रूप में नारी को देख पाएंगे।
Saturday, September 17, 2011
प्रकृति और पर्यावरण का नजारा
शंकर जालान
कोलकाता। उत्तर कोलकाता को अमहर्स्ट रो में सजने वाली दुर्गापूजा में दर्शक इस बार प्रकृति और पर्यावरण की खूबियों को महसूस कर पाएंगे। रोम मोहन स्मृति संघ की ओर से अमहर्स्ट रो में आयोजित होने वाली सार्वजनीन दुर्गोत्सव कमिटी के सदस्य धमेंद्रजायसावल ने बताया कि कमिटी के सदस्यों की थीम पर पंडाल, प्रतिमा, बिजली सज्जा प्रकृति व पर्यावरण पर केंद्रित है।
उन्होंने बताया कि 1959 से रोम मोहन स्मृति संघ लगातार पूजा आयोजित करता आ रहा है। इस हिसाब से 52वां साल है। जायसवाल ने बताया कि साल-दर-साल हमारी पूजा के प्रति दर्शकों का रुझान बढ़ा है। उन्होंने खुलासा किया कि बीते कुछ सालों के दौरान पूजा कमिटी को कई पुरस्कारों से नवाजा गया है।
उन्होंने बताया कि संघ के सदस्य पूजा के तीन-चार महीने पहले से ही थीम सोचने लगते हैं। और बाद में पूजा कमिटी की बैठक में थीम के बारे में अंतिम निर्णय लिया जाता है। उनके मुताबिक इस बार प्रकृति और पर्यावरण की थीम पर पूजा आयोजित की जा रही है।
उन्होंने बताया कि उनके पूजा पंडाल में आने वाले लोगों को पंडाल के बाहर तक आदिकालीन (रावण युग) की लंका और पंडाल के भीतर राम राज्य का नजारा दिखेगा। उन्होंने बताया कि पंडाल बनाने वाले कारीगर प्लाईवुड पर मिट््टी से रामायण की झांकिया बनाने में व्यस्त हैं। वहीं पंडाल के बाहर सीमेंट का विशाल अंगद बनाया गया। उन्होंने बताया कि पूर्व मेदिनीपुर जिले स्थित कांथी के सुकुमार बैरागी की परिकल्पना को साकार रूप देने में दर्जनों कारीदर बीते एक महीने से जुटे हैं।
जायसवाल ने बताया कि बिजली सज्जा के माध्यम से भी प्रकृति, पर्यावरण और हरियाली के महत्व पर प्रकाश डाला डाएगा। बिजली सज्जा का काम तन्मय इलेक्ट्रिक को दिया गया है।
प्रतिमा के बारे में जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि महिषासुर मर्दनी देवी दुर्गा के दर्शन हमारे पंडाल के दर्शक शांति देवी के रूप में कर पाएंगे। उन्होंने बताया कि शांति के प्रतीक के तौर पर बनी मूर्ति के हाथों में किसी प्रकार का कोई अस्त्र-शस्त्र नहीं होगा। मां दुर्गा का आठों हाथों में कमल के फूल होंगे।
उन्होंने बताया कि मूल रूप से हमारा प्रयास रहेगा कि लोग पूजा घूमने का आनंद लेने के साथ-साथ कुछ सीख भी लें, जो उनके और समाज के लिए हितकर हो।
बजट, उद्घाटन और विसर्जन के बारे में पूछे गए सवाल का जवाब देने हुए उन्होंने बताया कि इस बार पूजा का बजट सात लाख रुपए निर्धारित किया गया है। पूजा पंडाल का उद्घाटन एक अक्तूबर को और विसर्जन सात अक्तूबर को होगा।
कोलकाता। उत्तर कोलकाता को अमहर्स्ट रो में सजने वाली दुर्गापूजा में दर्शक इस बार प्रकृति और पर्यावरण की खूबियों को महसूस कर पाएंगे। रोम मोहन स्मृति संघ की ओर से अमहर्स्ट रो में आयोजित होने वाली सार्वजनीन दुर्गोत्सव कमिटी के सदस्य धमेंद्रजायसावल ने बताया कि कमिटी के सदस्यों की थीम पर पंडाल, प्रतिमा, बिजली सज्जा प्रकृति व पर्यावरण पर केंद्रित है।
उन्होंने बताया कि 1959 से रोम मोहन स्मृति संघ लगातार पूजा आयोजित करता आ रहा है। इस हिसाब से 52वां साल है। जायसवाल ने बताया कि साल-दर-साल हमारी पूजा के प्रति दर्शकों का रुझान बढ़ा है। उन्होंने खुलासा किया कि बीते कुछ सालों के दौरान पूजा कमिटी को कई पुरस्कारों से नवाजा गया है।
उन्होंने बताया कि संघ के सदस्य पूजा के तीन-चार महीने पहले से ही थीम सोचने लगते हैं। और बाद में पूजा कमिटी की बैठक में थीम के बारे में अंतिम निर्णय लिया जाता है। उनके मुताबिक इस बार प्रकृति और पर्यावरण की थीम पर पूजा आयोजित की जा रही है।
उन्होंने बताया कि उनके पूजा पंडाल में आने वाले लोगों को पंडाल के बाहर तक आदिकालीन (रावण युग) की लंका और पंडाल के भीतर राम राज्य का नजारा दिखेगा। उन्होंने बताया कि पंडाल बनाने वाले कारीगर प्लाईवुड पर मिट््टी से रामायण की झांकिया बनाने में व्यस्त हैं। वहीं पंडाल के बाहर सीमेंट का विशाल अंगद बनाया गया। उन्होंने बताया कि पूर्व मेदिनीपुर जिले स्थित कांथी के सुकुमार बैरागी की परिकल्पना को साकार रूप देने में दर्जनों कारीदर बीते एक महीने से जुटे हैं।
जायसवाल ने बताया कि बिजली सज्जा के माध्यम से भी प्रकृति, पर्यावरण और हरियाली के महत्व पर प्रकाश डाला डाएगा। बिजली सज्जा का काम तन्मय इलेक्ट्रिक को दिया गया है।
प्रतिमा के बारे में जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि महिषासुर मर्दनी देवी दुर्गा के दर्शन हमारे पंडाल के दर्शक शांति देवी के रूप में कर पाएंगे। उन्होंने बताया कि शांति के प्रतीक के तौर पर बनी मूर्ति के हाथों में किसी प्रकार का कोई अस्त्र-शस्त्र नहीं होगा। मां दुर्गा का आठों हाथों में कमल के फूल होंगे।
उन्होंने बताया कि मूल रूप से हमारा प्रयास रहेगा कि लोग पूजा घूमने का आनंद लेने के साथ-साथ कुछ सीख भी लें, जो उनके और समाज के लिए हितकर हो।
बजट, उद्घाटन और विसर्जन के बारे में पूछे गए सवाल का जवाब देने हुए उन्होंने बताया कि इस बार पूजा का बजट सात लाख रुपए निर्धारित किया गया है। पूजा पंडाल का उद्घाटन एक अक्तूबर को और विसर्जन सात अक्तूबर को होगा।
Friday, September 16, 2011
कांच की कला में दिखेंगे दुर्गा के 16 रूप
शंकर जालान
कोलकाता। विवेकानंद रोड और अमहर्स्ट स्ट्रीट के मुहाने पर मानिकतला-चलताबागान लोहापट््टी दुर्गा पूजा कमिटी के पूजा पंडाल में इस बार दर्शनार्थियों को कांच की कलाओं को बीच देवी दुर्गा के सोलह रूप दिखेंगे।
पूजा कमिटी के चेयरमैन संदीप भूतोड़िया और उपाध्यक्ष अशोक जायसवाल ने बताया कि 20 फीट चौड़े, 80 फीट लंबे और करीब 45 फीट ऊंचे पंडाल के पूर्व मेदिनीपुर कांथी के सुतनु माइती की परिकल्पना से बनाया जा रहा है। जायसवाल के मुताबिक करीबन 70 कारीगर बीते तीन महीने से पंडाल के लिए कांच के भाड़, कांच के गिलास, कांच की प्लेट, कांच की चूड़ियों से सजावट की सामग्री बने में जुटे हैं।
उन्होंने बताया कि चलता बागान के पूजा पंडाल में आने वाले लोगों को कांच से बनी दुर्गा के नारायणी, अंबिका व गौरी समेत कुल 16 रुप दिखेंगे। इसके अलावा दर्शक कांच की बारीक कला को भी निहार सकेंगे।
जायसवाल के मुताबिक 30 सितंबर को कई जाने माने व विशिष्ठ व्यक्तियों की मौजूदगी में पूजा पंडाल का उद्घाटन होगा और पूजा संपन्न होने के बाद आठ अक्तूबर को नम आंखों से मां दुर्गा समेत गणेश, कार्तिक, लक्ष्मी और सरस्वती को विदाई दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि जितेंद्र चंद्र पाल और बादल चंद्र पाल चतला बागान के पूजा पंडाल के लिए देवी दुर्गा के प्रतिमा बनाने में जुटे हैं। वहीं, बिजली सज्जा का काम नंदी इलेक्ट्रिक को दिया गया है। उपाध्यक्ष ने बताया कि बिजली की बचत के मद्देनजर ज्यादा से ज्यादा एलईडी लाइट लगाई जाएगी और कुछ स्थानों पर सोलर लाइट (सौर ऊर्जा) का प्रयोग किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि कमिटी हर वर्ष नई थीम और नई सोच के साथ पूजा आयोजित करती है। बीते साल यानी 2010 में मुगल इतिहास, 2009 में दक्षिण भारतीय मंदिर, 2008 में लोहे की जाल व स्प्रिंग, 2007 में नौका (बजरा), 2006 में महाभारत का रथ, 2005 में कुश, 2004 में काली सुराई, 2003 में बद्रीनाथ धाम और 2002 में 108 दुर्गा का पंडाल बना कर पूजा कमिटी के कई पुरस्कार जीते हैं। जायसवाल के मुताबिक पूजा कमिटी को बिगत में सीईएससी, द टेलीग्राफ, बीएसएनएल, ईटीवी बांग्ला, जामिनी साड़ी, दूरदर्शन कोलकाता, रोटरी क्लब और आनंद बाजार पत्रिका सम्मान मिल चुका है।
कोलकाता। विवेकानंद रोड और अमहर्स्ट स्ट्रीट के मुहाने पर मानिकतला-चलताबागान लोहापट््टी दुर्गा पूजा कमिटी के पूजा पंडाल में इस बार दर्शनार्थियों को कांच की कलाओं को बीच देवी दुर्गा के सोलह रूप दिखेंगे।
पूजा कमिटी के चेयरमैन संदीप भूतोड़िया और उपाध्यक्ष अशोक जायसवाल ने बताया कि 20 फीट चौड़े, 80 फीट लंबे और करीब 45 फीट ऊंचे पंडाल के पूर्व मेदिनीपुर कांथी के सुतनु माइती की परिकल्पना से बनाया जा रहा है। जायसवाल के मुताबिक करीबन 70 कारीगर बीते तीन महीने से पंडाल के लिए कांच के भाड़, कांच के गिलास, कांच की प्लेट, कांच की चूड़ियों से सजावट की सामग्री बने में जुटे हैं।
उन्होंने बताया कि चलता बागान के पूजा पंडाल में आने वाले लोगों को कांच से बनी दुर्गा के नारायणी, अंबिका व गौरी समेत कुल 16 रुप दिखेंगे। इसके अलावा दर्शक कांच की बारीक कला को भी निहार सकेंगे।
जायसवाल के मुताबिक 30 सितंबर को कई जाने माने व विशिष्ठ व्यक्तियों की मौजूदगी में पूजा पंडाल का उद्घाटन होगा और पूजा संपन्न होने के बाद आठ अक्तूबर को नम आंखों से मां दुर्गा समेत गणेश, कार्तिक, लक्ष्मी और सरस्वती को विदाई दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि जितेंद्र चंद्र पाल और बादल चंद्र पाल चतला बागान के पूजा पंडाल के लिए देवी दुर्गा के प्रतिमा बनाने में जुटे हैं। वहीं, बिजली सज्जा का काम नंदी इलेक्ट्रिक को दिया गया है। उपाध्यक्ष ने बताया कि बिजली की बचत के मद्देनजर ज्यादा से ज्यादा एलईडी लाइट लगाई जाएगी और कुछ स्थानों पर सोलर लाइट (सौर ऊर्जा) का प्रयोग किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि कमिटी हर वर्ष नई थीम और नई सोच के साथ पूजा आयोजित करती है। बीते साल यानी 2010 में मुगल इतिहास, 2009 में दक्षिण भारतीय मंदिर, 2008 में लोहे की जाल व स्प्रिंग, 2007 में नौका (बजरा), 2006 में महाभारत का रथ, 2005 में कुश, 2004 में काली सुराई, 2003 में बद्रीनाथ धाम और 2002 में 108 दुर्गा का पंडाल बना कर पूजा कमिटी के कई पुरस्कार जीते हैं। जायसवाल के मुताबिक पूजा कमिटी को बिगत में सीईएससी, द टेलीग्राफ, बीएसएनएल, ईटीवी बांग्ला, जामिनी साड़ी, दूरदर्शन कोलकाता, रोटरी क्लब और आनंद बाजार पत्रिका सम्मान मिल चुका है।
कांच की कला में दिखेंगे दुर्गा के 16 रूप
शंकर जालान
कोलकाता। विवेकानंद रोड और अमहर्स्ट स्ट्रीट के मुहाने पर मानिकतला-चलताबागान लोहापट््टी दुर्गा पूजा कमिटी के पूजा पंडाल में इस बार दर्शनार्थियों को कांच की कलाओं को बीच देवी दुर्गा के सोलह रूप दिखेंगे।
पूजा कमिटी के चेयरमैन संदीप भूतोड़िया और उपाध्यक्ष अशोक जायसवाल ने बताया कि 20 फीट चौड़े, 80 फीट लंबे और करीब 45 फीट ऊंचे पंडाल के पूर्व मेदिनीपुर कांथी के सुतनु माइती की परिकल्पना से बनाया जा रहा है। जायसवाल के मुताबिक करीबन 70 कारीगर बीते तीन महीने से पंडाल के लिए कांच के भाड़, कांच के गिलास, कांच की प्लेट, कांच की चूड़ियों से सजावट की सामग्री बने में जुटे हैं।
उन्होंने बताया कि चलता बागान के पूजा पंडाल में आने वाले लोगों को कांच से बनी दुर्गा के नारायणी, अंबिका व गौरी समेत कुल 16 रुप दिखेंगे। इसके अलावा दर्शक कांच की बारीक कला को भी निहार सकेंगे।
जायसवाल के मुताबिक 30 सितंबर को कई जाने माने व विशिष्ठ व्यक्तियों की मौजूदगी में पूजा पंडाल का उद्घाटन होगा और पूजा संपन्न होने के बाद आठ अक्तूबर को नम आंखों से मां दुर्गा समेत गणेश, कार्तिक, लक्ष्मी और सरस्वती को विदाई दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि जितेंद्र चंद्र पाल और बादल चंद्र पाल चतला बागान के पूजा पंडाल के लिए देवी दुर्गा के प्रतिमा बनाने में जुटे हैं। वहीं, बिजली सज्जा का काम नंदी इलेक्ट्रिक को दिया गया है। उपाध्यक्ष ने बताया कि बिजली की बचत के मद्देनजर ज्यादा से ज्यादा एलईडी लाइट लगाई जाएगी और कुछ स्थानों पर सोलर लाइट (सौर ऊर्जा) का प्रयोग किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि कमिटी हर वर्ष नई थीम और नई सोच के साथ पूजा आयोजित करती है। बीते साल यानी 2010 में मुगल इतिहास, 2009 में दक्षिण भारतीय मंदिर, 2008 में लोहे की जाल व स्प्रिंग, 2007 में नौका (बजरा), 2006 में महाभारत का रथ, 2005 में कुश, 2004 में काली सुराई, 2003 में बद्रीनाथ धाम और 2002 में 108 दुर्गा का पंडाल बना कर पूजा कमिटी के कई पुरस्कार जीते हैं। जायसवाल के मुताबिक पूजा कमिटी को बिगत में सीईएससी, द टेलीग्राफ, बीएसएनएल, ईटीवी बांग्ला, जामिनी साड़ी, दूरदर्शन कोलकाता, रोटरी क्लब और आनंद बाजार पत्रिका सम्मान मिल चुका है।
कोलकाता। विवेकानंद रोड और अमहर्स्ट स्ट्रीट के मुहाने पर मानिकतला-चलताबागान लोहापट््टी दुर्गा पूजा कमिटी के पूजा पंडाल में इस बार दर्शनार्थियों को कांच की कलाओं को बीच देवी दुर्गा के सोलह रूप दिखेंगे।
पूजा कमिटी के चेयरमैन संदीप भूतोड़िया और उपाध्यक्ष अशोक जायसवाल ने बताया कि 20 फीट चौड़े, 80 फीट लंबे और करीब 45 फीट ऊंचे पंडाल के पूर्व मेदिनीपुर कांथी के सुतनु माइती की परिकल्पना से बनाया जा रहा है। जायसवाल के मुताबिक करीबन 70 कारीगर बीते तीन महीने से पंडाल के लिए कांच के भाड़, कांच के गिलास, कांच की प्लेट, कांच की चूड़ियों से सजावट की सामग्री बने में जुटे हैं।
उन्होंने बताया कि चलता बागान के पूजा पंडाल में आने वाले लोगों को कांच से बनी दुर्गा के नारायणी, अंबिका व गौरी समेत कुल 16 रुप दिखेंगे। इसके अलावा दर्शक कांच की बारीक कला को भी निहार सकेंगे।
जायसवाल के मुताबिक 30 सितंबर को कई जाने माने व विशिष्ठ व्यक्तियों की मौजूदगी में पूजा पंडाल का उद्घाटन होगा और पूजा संपन्न होने के बाद आठ अक्तूबर को नम आंखों से मां दुर्गा समेत गणेश, कार्तिक, लक्ष्मी और सरस्वती को विदाई दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि जितेंद्र चंद्र पाल और बादल चंद्र पाल चतला बागान के पूजा पंडाल के लिए देवी दुर्गा के प्रतिमा बनाने में जुटे हैं। वहीं, बिजली सज्जा का काम नंदी इलेक्ट्रिक को दिया गया है। उपाध्यक्ष ने बताया कि बिजली की बचत के मद्देनजर ज्यादा से ज्यादा एलईडी लाइट लगाई जाएगी और कुछ स्थानों पर सोलर लाइट (सौर ऊर्जा) का प्रयोग किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि कमिटी हर वर्ष नई थीम और नई सोच के साथ पूजा आयोजित करती है। बीते साल यानी 2010 में मुगल इतिहास, 2009 में दक्षिण भारतीय मंदिर, 2008 में लोहे की जाल व स्प्रिंग, 2007 में नौका (बजरा), 2006 में महाभारत का रथ, 2005 में कुश, 2004 में काली सुराई, 2003 में बद्रीनाथ धाम और 2002 में 108 दुर्गा का पंडाल बना कर पूजा कमिटी के कई पुरस्कार जीते हैं। जायसवाल के मुताबिक पूजा कमिटी को बिगत में सीईएससी, द टेलीग्राफ, बीएसएनएल, ईटीवी बांग्ला, जामिनी साड़ी, दूरदर्शन कोलकाता, रोटरी क्लब और आनंद बाजार पत्रिका सम्मान मिल चुका है।
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