शंकर जालान
दुर्गा पूजा में अब तीन सप्ताह शेष रह गए हैं। उत्तर कोलकाता के कुम्हारटोली के मूर्तिकार मां दुर्गा समेत सरस्वती, लक्ष्मी, गणेश व कार्तिक की प्रतिमा बनाने में जुटे हैं। यहां के मूर्तिकार इनदिनों युद्धस्तर पर विभिन्न तरह की मूर्ति गढ़ने में व्यस्त है। कोई मूर्तिकार अण्णा हजारे की इलक तो कोई राक्षस विहीन मूर्ति बना रहा है। कोई अन्नपूर्णा के रुप में तो कई पांच शेरों वाली प्रतिमा बनाने में जुटा है। कोई एक सौ आठ भुजा वाल तो कई नवदुर्गा की प्रतिमा को अंतिम रूप दे रहा है।
मूर्तिकारों का कहना है कि पांच दिवसीय दुर्गोत्सव की तैयारी में मोटे तौर पर वे पांच महीने पहले से लग जाते हैं। मूर्तिकारों के मुताबिक विसर्जन यानी विजया दशमी के बाद से ही वे अगले साल के लिए प्रतिमा निर्माण के बारे में सोचने लगते हैं।
चायना पाल नामक एक महिला मूर्तिकार ने बताया कि कुछ मूर्तियां का निर्माण वे अपनी कल्पना से करती हैं और कुछ आयोजकों की मांग के मुताबिक। एक अन्य मूर्तिकार ने बताया कि जमाना एकरुपता का है, इसलिए कई आयोजक पंडाल व बिजली सज्जा के अनुरुप मूर्ति बनवाते हैं। वे कहते हैं - जो मूर्ति आयोजकों की मांग पर बनती है उनमें वे खुल कर अपनी प्रतिभा नहीं दिखा पाते, क्योंकि मूर्ति की लंबाई, चौड़ाई व रंग आदि का निर्णय आयोजक लेते हैं।
मूर्तिकार मुरली पाल ने बताया कि एकरुपता देखने में अच्छी लगती है। इसलिए मूर्ति निर्माण में कुछ कमी रह जाती है तो उसे दर्शनार्थी समझ नहीं पाते। उन्होंने कहा कि अगर आयोजकों की बंदिश ने हो तो मूर्तिकार और बेहतर तरीके से अपनी कारीगरी का नमूना पेश कर सकता है। पाल ने कहा- आयोजकों की मांग के मुताबिक जो मूर्तियां बनाई जाती है, बेशक उसकी कीमत उन्हें अधिक मिलती है। आधा से अधिक भुगतान महालया के पहले ही मिल जाता है। उन्होंने बताया कि जो मूर्तियां वे अपनी कल्पना के आधार पर बनाते हैं उसमें स्वतंत्र रुप से कलाकारी की छूट रहती है। हालांकि ऐसी प्रतिमा को बेचने और फिर उसका भुगतान वसूलने में उन्हें काफी दिक्कत होती है।
मूर्तिकारों के संगठन के एक वरिष्ठ सदस्य ने बताया कि इस वर्ष कुम्हारटोली में करीब सात सौ मूर्तियां बनाई जा रह है। इनमें लगभग आधी यानी ३५० मूर्तियां को विभिन्न पूजा कमिटियों ने अग्रिम राशि देकर बुक कर लिया है। उन्होंने बताया कि इस बार करीब ९० प्रतिमा आयोजकों की मांग और उनकी थीम के मुताबिक बनाई जा रही है। शेष करीब छह सौ मूर्तियों को यहां के मर्तिकारों ने अपनी सोच व कल्पना के आधार पर गढ़ा है।
उन्होंने बताया कि इस साल प्रतिमाओं में अण्णा इफेक्ट अधिक है। इसके अलावा राक्षस विहीन, पांच शेरों वाली, अन्नपूर्णा, नवदुर्गा, १०८ भुजा वाली प्रतिमा भी बनाई जा रही है।
अण्णा हजारे की इलक वाली समेत करीब १५ प्रतिमा बनाने में जुटे रुद्र पाल ने बताया कि अण्णा इफेक्ट की मूर्ति गढ़ने का मुख्य उद्देश्य भ्रष्टाचार मुक्त भारत का निर्माण है। उन्होंने बताया कि मेरी सोच थी कि ऐसी मूर्ति गढ़ी जाए जो भारत की ज्वलंत समस्या को उजागर करें। उन्होंने बताया कि मेरे लिए खुशी की बात यह है कि सबसे पहले इसी मूर्ति को एक पूजा कमिटी ने बुक करवाया। यह पूछे जाने पर कि किस पूजा कमिटी ने यह प्रतिमा बुक कराई है और कहां के पंडाल में इसे रखा जाएगा? इसका जवाब देने से उन्होंने इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि यह गोपनीयता के नजरिए से ठीक नहीं है।
इसी तरह पांच शेरों वाली मूर्ति बनाने में जुटे कृष्णा पाल ने बताया कि बीते साल उन्होंने तीन शेर वाली प्रतिमा बनाई थी। वह मूर्ति अच्छी कीमत पर बिकी। उसी से प्रेरित होकर मैंने इस बार पांच शेर वाली प्रतिमा बनाने की ठानी। इसी प्रकार सनातन पाल १०८ भुजा वाली, रामचरण पाल अन्नपूर्णा स्वरुपा और बद्रीनाथ एकरंगी प्रतिमा बनाने में जुटे हैं।
Sunday, September 11, 2011
Saturday, September 10, 2011
दक्षिणेश्वर में होंगे दुर्गा के दर्शन
शंकर जालान
कोलकाता, मां काली के प्रसिद्ध मंदिर यानी दक्षिणेश्वर की आकृति के पूजा पंडाल में इस बार दर्शकों को देवी दुर्गा के दर्शन होंगे। सिंघी पार्क सार्वजनीन दुर्गा पूजा कमिटी की ओर से इस बार दक्षिणेश्वर मंदिर की तर्ज पर पूजा पंडाल बनाया जा रहा है। पूजा के कमिटी के संयुक्त सचिव भास्कर नंदी ने बताया कि मेदिनीपुर के शुतानु माइती के देखरेख व मार्गदर्शन में सैंकड़ों कारीगर पंडाल के अंतिम रूप देने में जुटे हैं। उन्होंने बताया कि इस बार पूजा कमिटी का बजट करीब चालीस लाख रुपए हैं और पूजा पंडाल का उद्घाटन महापंचमी (एक अक्तूबर) को होगा। इस मौके पर कई जानेमाने लोग बतौर अतिथि मौजूद रहेंगे।
माइती ने बताया कि उनके पंडाल में आने लोगों को पारंपरिक रुप यानी एक चाल में देवी दुर्गा समेत लक्ष्मी, सरस्वती, गणेश व कार्तिक के दर्शन होंगे। उन्होंने बताया कि मोहनवासी रुद्र पाल और प्रदीप रुद्र पाल सिंघी पार्क के पूजा पंडाल के लिए 22 फीट ऊंची प्रतिमा निर्माण में जुटे हैं।
उन्होंने बताया कि बिजली सज्जा की जिम्मेदारी हुगली जिला स्थित चंदननगर के पिंटू चक्रवर्ती को दी गई है। संयुक्त सचिव के मुताबिक बिजली सज्जा पर्यावरण आधारित होगी और बिजली के बचत के मद्देनजर ज्यादा से ज्यादा एलईडी लाइट का प्रयोग किया जाएगा।
माइती ने बताया कि उनकी कमिटी पारंपरिक पूजा आयोजित करने में विश्वास रखती है। उन्होंने बताया की थीम के नाम पर पारंपरिक पूजा से खिलवाड़ उनकी कमिटी के किसी सदस्यों को नहीं भाता। उन्होंने बताया कि कलकत्ता उच्च न्यायालय, नगर निगम और पुलिस के सभी नियमों का पालन किया जा रहा है, ताकि आने वाले दर्शकों को किसी तरह की कोई परेशानी न हो। उन्होंने बताया कि दर्शकों की भारी भीड़ के मद्देनजर 14 फीट बटा 12 फीट के प्रवेश व निष्कान द्वार बनाए गए हैं। इनके अलावा पंडाल परिसर में आग से रोकथाम की माकूल व्यवस्था की जा रही है।
दूसरी ओर, साल्टलेक इलाके के विधाननगर सीके-सीएल ब्लॉक रेसिडेंट एसोसिएशन पूजा आयोजन की रजत जयंती मना रहा है। एसोसिएशन के दिव्येंदु बनर्जी ने बताया कि रजत जयंती के मद्देनजर इस बार की पूजा प्रगति (प्रोग्रेस) पर आधारित है। उन्होंने बताया कि पूर्व मेदिनीपुर के कांथी के कारीगर स्टील की जाली का भव्य पंडाल बनाने में जुटे हैं।
उनके मुताबिक तीन हजार वर्गफीट में फैले पंडाल को बनाने में पांच हजार किलो स्टील की जाली का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 35 लाख की लागत से आयोजित होने वाली पूजा पंडाल का उद्घाटन चौथ (30 सितंबर) को कई विशिष्ठ लोगों की मौजूदगी में होगा। उनके मुताबिक प्रतिमा निर्माण का काम मोहनवासी रुद्र पाल और प्रदीप रुद्र पाल को दिया गया है। दोनों मूर्तिकार अपनी सोच और कला के सहारे पंडाल और थीम से मेल खाती प्रतिमा बनाने में जुटे हैं।
कोलकाता, मां काली के प्रसिद्ध मंदिर यानी दक्षिणेश्वर की आकृति के पूजा पंडाल में इस बार दर्शकों को देवी दुर्गा के दर्शन होंगे। सिंघी पार्क सार्वजनीन दुर्गा पूजा कमिटी की ओर से इस बार दक्षिणेश्वर मंदिर की तर्ज पर पूजा पंडाल बनाया जा रहा है। पूजा के कमिटी के संयुक्त सचिव भास्कर नंदी ने बताया कि मेदिनीपुर के शुतानु माइती के देखरेख व मार्गदर्शन में सैंकड़ों कारीगर पंडाल के अंतिम रूप देने में जुटे हैं। उन्होंने बताया कि इस बार पूजा कमिटी का बजट करीब चालीस लाख रुपए हैं और पूजा पंडाल का उद्घाटन महापंचमी (एक अक्तूबर) को होगा। इस मौके पर कई जानेमाने लोग बतौर अतिथि मौजूद रहेंगे।
माइती ने बताया कि उनके पंडाल में आने लोगों को पारंपरिक रुप यानी एक चाल में देवी दुर्गा समेत लक्ष्मी, सरस्वती, गणेश व कार्तिक के दर्शन होंगे। उन्होंने बताया कि मोहनवासी रुद्र पाल और प्रदीप रुद्र पाल सिंघी पार्क के पूजा पंडाल के लिए 22 फीट ऊंची प्रतिमा निर्माण में जुटे हैं।
उन्होंने बताया कि बिजली सज्जा की जिम्मेदारी हुगली जिला स्थित चंदननगर के पिंटू चक्रवर्ती को दी गई है। संयुक्त सचिव के मुताबिक बिजली सज्जा पर्यावरण आधारित होगी और बिजली के बचत के मद्देनजर ज्यादा से ज्यादा एलईडी लाइट का प्रयोग किया जाएगा।
माइती ने बताया कि उनकी कमिटी पारंपरिक पूजा आयोजित करने में विश्वास रखती है। उन्होंने बताया की थीम के नाम पर पारंपरिक पूजा से खिलवाड़ उनकी कमिटी के किसी सदस्यों को नहीं भाता। उन्होंने बताया कि कलकत्ता उच्च न्यायालय, नगर निगम और पुलिस के सभी नियमों का पालन किया जा रहा है, ताकि आने वाले दर्शकों को किसी तरह की कोई परेशानी न हो। उन्होंने बताया कि दर्शकों की भारी भीड़ के मद्देनजर 14 फीट बटा 12 फीट के प्रवेश व निष्कान द्वार बनाए गए हैं। इनके अलावा पंडाल परिसर में आग से रोकथाम की माकूल व्यवस्था की जा रही है।
दूसरी ओर, साल्टलेक इलाके के विधाननगर सीके-सीएल ब्लॉक रेसिडेंट एसोसिएशन पूजा आयोजन की रजत जयंती मना रहा है। एसोसिएशन के दिव्येंदु बनर्जी ने बताया कि रजत जयंती के मद्देनजर इस बार की पूजा प्रगति (प्रोग्रेस) पर आधारित है। उन्होंने बताया कि पूर्व मेदिनीपुर के कांथी के कारीगर स्टील की जाली का भव्य पंडाल बनाने में जुटे हैं।
उनके मुताबिक तीन हजार वर्गफीट में फैले पंडाल को बनाने में पांच हजार किलो स्टील की जाली का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 35 लाख की लागत से आयोजित होने वाली पूजा पंडाल का उद्घाटन चौथ (30 सितंबर) को कई विशिष्ठ लोगों की मौजूदगी में होगा। उनके मुताबिक प्रतिमा निर्माण का काम मोहनवासी रुद्र पाल और प्रदीप रुद्र पाल को दिया गया है। दोनों मूर्तिकार अपनी सोच और कला के सहारे पंडाल और थीम से मेल खाती प्रतिमा बनाने में जुटे हैं।
Friday, September 9, 2011
मंदिर की तर्ज पर बन रहा है यंग ब्वायज क्लब का पूजा पंडाल
शंकर जालान
मध्य कोलकाता के ताराचंद दत्त स्ट्रीट में बीते 42 सालों से यंग ब्वायज क्लब के बैनर तले आयोजित होने वाली दुर्गापूजा कलात्मक प्रतिमा के लिए जानी जाती है। इस बार यहां का पूजा पंडाल दक्षिण भारत के एक प्रसिद्ध मंदिर की तर्ज पर बनाया जा रहा है। पूजा पंडाल का उद्घाटन एक अक्टूबर को होगा। इस मौके पर राजनीतिक, सामाजिक व प्रशासनिक क्षेत्र से जुड़े कई जानेमाने लोग बतौर अतिथि मौजूद रहेंगे। पूजा के मुख्य आयोजक राकेश सिंह और विक्रांत सिंह ने बताया कि देश के विभिन्न शहरों में स्थित किसी न किसी मंदिर की हू-ब-हू आकृति का पंडाल बीते कई वर्षों से बनाया जा रहा है। इसी कड़ी में इस बार दक्षिण भारत के प्रसिद्ध मंदिर की तर्ज पर भव्य व कलात्मक पंडाल बनाया जा रहा है। सिंह ने बताया कि चंद्रा डेकोरेटर्स के कई कारीगर बीते कई सप्ताह से पंडाल बनाने में जुटे हैं। उन्होंने बताया कि पंडाल की तुलना में वे चाहते हैं कि प्रतिमा अधिक कलात्मक और दर्शनीय हो।
सिंह ने बताया कि कई सालों से उल्टाडांगा के मूर्तिकार सनातन रुद्र पाल उनके पूजा पंडाल के लिए प्रतिमा बनाते आ रहे थे। 2009 में मूर्तिकार तारक पाल ने मां दुर्गा समेत गणेश, कार्तिक, लक्ष्मी व सरस्वती की मूर्ति बनाई थी। 2010 में सुबोधचंद्र पाल को प्रतिमा बनाने का जिम्मा दिया गया है। इस बार यानी 2011 में सुबोधचंद्र के साथ राजीव पाल भी प्रतिमा निर्माण में जुटे हैं। सिंह के मुताबिक एक प्लेट पर मिट््टी से बनी प्रतिमा में मूर्तिकार क्लब के सदस्यों की सोच और अपने अनुभव से ऐसी कलाकृत्ति प्रस्तुत करता है कि देखने वाले देखते ही रह जाते हैं।
बिजली सज्जा के सवाल पर विनोद सिंह ने बताया कि तारातंद दत्त स्ट्रीट के दोनों छोर (रवींद्र सरणी से चित्तरंजन एवेन्यू तक) पर बल्बों की लटकन, वृक्षों पर पर्यावरण के महत्त्व को उजागर करने के मकसद से हरी ट्यूब लाइट और पंडाल के समीप काफी संख्या में हेलोजिन लाइटें लगाई जाएंगी। सिंह ने बताया कि पंडाल के भीतर लगने वाला विशाल झूमर भी देखने लायक होगा। 2010 में बिजली सज्जा की जिम्मेवारी एसके इलेक्ट्रिक व जीके इलेक्ट्रिक के कंधे पर थी, लेकिन इस बार देबु इलेक्ट्रिक को यह काम सौंपा गया है। उन्होंने बताया कि कलात्मक प्रतिमा के लिए क्लब को कई बार विभिन्न सरकारी व गैरसरकारी संगठनों की ओर से पुरस्कत किया गया है और उनके पंडाल में रखी प्रतिमाओं को संग्रहालयों में भी भेजा गया है।
मध्य कोलकाता के ताराचंद दत्त स्ट्रीट में बीते 42 सालों से यंग ब्वायज क्लब के बैनर तले आयोजित होने वाली दुर्गापूजा कलात्मक प्रतिमा के लिए जानी जाती है। इस बार यहां का पूजा पंडाल दक्षिण भारत के एक प्रसिद्ध मंदिर की तर्ज पर बनाया जा रहा है। पूजा पंडाल का उद्घाटन एक अक्टूबर को होगा। इस मौके पर राजनीतिक, सामाजिक व प्रशासनिक क्षेत्र से जुड़े कई जानेमाने लोग बतौर अतिथि मौजूद रहेंगे। पूजा के मुख्य आयोजक राकेश सिंह और विक्रांत सिंह ने बताया कि देश के विभिन्न शहरों में स्थित किसी न किसी मंदिर की हू-ब-हू आकृति का पंडाल बीते कई वर्षों से बनाया जा रहा है। इसी कड़ी में इस बार दक्षिण भारत के प्रसिद्ध मंदिर की तर्ज पर भव्य व कलात्मक पंडाल बनाया जा रहा है। सिंह ने बताया कि चंद्रा डेकोरेटर्स के कई कारीगर बीते कई सप्ताह से पंडाल बनाने में जुटे हैं। उन्होंने बताया कि पंडाल की तुलना में वे चाहते हैं कि प्रतिमा अधिक कलात्मक और दर्शनीय हो।
सिंह ने बताया कि कई सालों से उल्टाडांगा के मूर्तिकार सनातन रुद्र पाल उनके पूजा पंडाल के लिए प्रतिमा बनाते आ रहे थे। 2009 में मूर्तिकार तारक पाल ने मां दुर्गा समेत गणेश, कार्तिक, लक्ष्मी व सरस्वती की मूर्ति बनाई थी। 2010 में सुबोधचंद्र पाल को प्रतिमा बनाने का जिम्मा दिया गया है। इस बार यानी 2011 में सुबोधचंद्र के साथ राजीव पाल भी प्रतिमा निर्माण में जुटे हैं। सिंह के मुताबिक एक प्लेट पर मिट््टी से बनी प्रतिमा में मूर्तिकार क्लब के सदस्यों की सोच और अपने अनुभव से ऐसी कलाकृत्ति प्रस्तुत करता है कि देखने वाले देखते ही रह जाते हैं।
बिजली सज्जा के सवाल पर विनोद सिंह ने बताया कि तारातंद दत्त स्ट्रीट के दोनों छोर (रवींद्र सरणी से चित्तरंजन एवेन्यू तक) पर बल्बों की लटकन, वृक्षों पर पर्यावरण के महत्त्व को उजागर करने के मकसद से हरी ट्यूब लाइट और पंडाल के समीप काफी संख्या में हेलोजिन लाइटें लगाई जाएंगी। सिंह ने बताया कि पंडाल के भीतर लगने वाला विशाल झूमर भी देखने लायक होगा। 2010 में बिजली सज्जा की जिम्मेवारी एसके इलेक्ट्रिक व जीके इलेक्ट्रिक के कंधे पर थी, लेकिन इस बार देबु इलेक्ट्रिक को यह काम सौंपा गया है। उन्होंने बताया कि कलात्मक प्रतिमा के लिए क्लब को कई बार विभिन्न सरकारी व गैरसरकारी संगठनों की ओर से पुरस्कत किया गया है और उनके पंडाल में रखी प्रतिमाओं को संग्रहालयों में भी भेजा गया है।
Thursday, September 8, 2011
पंडाल निर्माण का काम जोरों पर, बढ़ गई मूर्तिकारों की व्यस्तता
शंकर जालान
कोलकाता । पश्चिम बंगाल के मुख्य पर्व दुर्गापूजा में लगभग तीन सप्ताह शेष रह गया है। इस लिहाज से बड़ी-बड़ी पूजा पंडाल के निर्माण का काम जोरों पर हैं। वहीं उत्तर कोलकाता स्थित कुम्हारटोली के मूर्तिकारों को व्यस्तता बढ़ गई है। दक्षिण, मध्य और उत्तर कोलकाता की कुछ पूजा कमिटियों की ओर से आयोजित होने वाली दुर्गापूजा को देखने के लिए राज्य के विभिन्न जिलों के अलावा अन्य राज्यों से भी लोग आते हैं। इसी के मद्देनजर ये पूजा कमिटियां साज-सज्जा पर विशेष ध्यान दे रही हैं।
दक्षिण कोलकाता के अलीपुर स्थित सुरुची संघ क्लब, कालीघाट स्थित तरुण सार्वजनीन दुर्गोत्सव, बालीगंज स्थित बालीगंज सार्वजनिक दुर्गा पूजा कमिटी, मध्य कोलकाता के तारा चंद दत्त स्ट्रीट स्थित यंग ब्यावज क्लब, मोहम्मद अली पार्क स्थित यूथ एसोसिएशन, बड़तला स्ट्रीट स्थित जौहरी पट््टी सार्वजनिक दुर्गापूजा, उत्तर कोलकाता के पाथुरियाघाट स्थित पांचेर पल्ली, अरविंद सरणी स्थित सतदल और काशीपुर स्थिथ बीबी बाजार दुर्गापूजा समिति समेत कई पूजा आयोजकों की बैनर तले आयोजित होने वाली पूजा के लिए इनदिनों पंडाल निर्माण का काम जोरों पर हैं। इन पूजा पंडालों के तैयार करने पर दर्जनों कारीगर दिन-रात एक किए हुए हैं।
इस बार की पूजा थीम के बारे में बताते हुए सुरुची संघ क्लब के अरुप विश्वास ने बताया कि कश्मीर को देश का स्वर्ग कहा जाता है, लेकिन वैश्विक उष्णता (ग्लोबल वार्मिंग) से वहां का भी पर्यावरण प्रभावित हो रहा है। घाटी की बर्फ पिघल रही है और इसी कारण वहां की सुन्दरता में कमी आ रही है। इसी के ध्यान में रखते हुए सुरुची संघ क्लब ने इस बार कश्मीर को अपनी थीम बनाया है। उन्होंने बताया कि हम पंडाल घूमने आए लोगों को पंडाल सज्जा के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं। उनके मुताबिक 1952 में स्थापित इस क्लब का यह 58वां वर्ष है और हर वर्ष की तरह यहां पूजा के तीन महीने पहले से की पंडाल बनाने का कार्य प्रारंभ हो जाता हैं। विश्वास ने बताया कि कश्मीर को महानगर में उतारने के लिए 135-140 कमर्चारी दिन-रात काम कर रहे है और उम्मीद है कि 26 सिंतबर (महालया) तक पंडाल निर्माण का काम पूरा हो जाएगा। उन्होंने बताया कि कश्मीर का रंग जमाने के लिए सिंकारा (नाव) के साथ ही वहां की लोक कला संस्कृति को भी प्रस्तुत करने की कोशिश की जा रही है।
वहीं, पूर्वाचल शक्ति संघ की ओर से आयोजित दुर्गापूजा की तैयारियां जोर शोर से जारी है। पंडाल निर्माण में लगे कारीगर थीम में जीवंतता लाने के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं। संघ के एक वरिष्ठ सदस्य ने बताया कि मुताबिक इस बार उनकी थीम सपना है। उन्होंने बताया कि कठोर परिस्थितियों के बावजूद भी लोगों के मरे नहीं है। हर व्यक्ति उन्हें पूरा करने की कोशिश करता है। एक अन्य सदस्य नेव बताया कि एसएन मुखर्जी की देखरेखमें करीब 25 कारीगर थीम में जान डालने के लिए तल्लीन है। उन्होंने बताया कि पंडाल निर्माण छह लाख रुपए की लागत आएगी, जबकि बिजली सज्जा पर तीन लाख खर्च किया जाएगा। पूजा कमिटी के एक सदस्य ने बताया कि बीते साल पूर्वाचल शक्ति संघ ने दुर्गापूजा की थीम को बच्चों पर भी आधारित किया था। इसके तहत कविगुरू रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा बच्चों के लिए लिखे गए सहज पाठ के विभिन्न पृष्ठों को पूजा पंडाल में प्रस्तुत किया गया था।
दूसरी ओर, ज्यों-ज्यों दुर्गापूजा के दिन नजदीक आ रहे हैं, त्यों-त्यों मूर्तिकारों की व्यस्तता बढ़ गई है। मूर्तिकारों के मुताबिक अब उनके पास बिल्कुल फुसर्त नहीं है। विभिन्न पूजा कमिटियों का दवाब बढ़ रहा है और सभी चाहते हैं कि महालया (26 सितंबर) तक मूर्तियां उनके पंडाल में पहुंच जाए। रुद्र पाल नामक एक मूर्तिकार ने बताया कि दिक्कत तब आती है, जब सभी पूजा कमिटियां वाले यहीं कहते हैं कि उनक् पंडाल में मूर्ति महालया के ही दिन पहुंचे। महालया से एक दिन पहले या बाद में प्रतिमा पंडाल में पहुंचाने पर वे नाराज हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि मूर्तियां पंडाल में पहुंचने के बाद भी उनका कुछ काम बाकी रह जाता है, जिसे हमें पंडाल में जाकर पूरा करना पड़ता है।
कोलकाता । पश्चिम बंगाल के मुख्य पर्व दुर्गापूजा में लगभग तीन सप्ताह शेष रह गया है। इस लिहाज से बड़ी-बड़ी पूजा पंडाल के निर्माण का काम जोरों पर हैं। वहीं उत्तर कोलकाता स्थित कुम्हारटोली के मूर्तिकारों को व्यस्तता बढ़ गई है। दक्षिण, मध्य और उत्तर कोलकाता की कुछ पूजा कमिटियों की ओर से आयोजित होने वाली दुर्गापूजा को देखने के लिए राज्य के विभिन्न जिलों के अलावा अन्य राज्यों से भी लोग आते हैं। इसी के मद्देनजर ये पूजा कमिटियां साज-सज्जा पर विशेष ध्यान दे रही हैं।
दक्षिण कोलकाता के अलीपुर स्थित सुरुची संघ क्लब, कालीघाट स्थित तरुण सार्वजनीन दुर्गोत्सव, बालीगंज स्थित बालीगंज सार्वजनिक दुर्गा पूजा कमिटी, मध्य कोलकाता के तारा चंद दत्त स्ट्रीट स्थित यंग ब्यावज क्लब, मोहम्मद अली पार्क स्थित यूथ एसोसिएशन, बड़तला स्ट्रीट स्थित जौहरी पट््टी सार्वजनिक दुर्गापूजा, उत्तर कोलकाता के पाथुरियाघाट स्थित पांचेर पल्ली, अरविंद सरणी स्थित सतदल और काशीपुर स्थिथ बीबी बाजार दुर्गापूजा समिति समेत कई पूजा आयोजकों की बैनर तले आयोजित होने वाली पूजा के लिए इनदिनों पंडाल निर्माण का काम जोरों पर हैं। इन पूजा पंडालों के तैयार करने पर दर्जनों कारीगर दिन-रात एक किए हुए हैं।
इस बार की पूजा थीम के बारे में बताते हुए सुरुची संघ क्लब के अरुप विश्वास ने बताया कि कश्मीर को देश का स्वर्ग कहा जाता है, लेकिन वैश्विक उष्णता (ग्लोबल वार्मिंग) से वहां का भी पर्यावरण प्रभावित हो रहा है। घाटी की बर्फ पिघल रही है और इसी कारण वहां की सुन्दरता में कमी आ रही है। इसी के ध्यान में रखते हुए सुरुची संघ क्लब ने इस बार कश्मीर को अपनी थीम बनाया है। उन्होंने बताया कि हम पंडाल घूमने आए लोगों को पंडाल सज्जा के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं। उनके मुताबिक 1952 में स्थापित इस क्लब का यह 58वां वर्ष है और हर वर्ष की तरह यहां पूजा के तीन महीने पहले से की पंडाल बनाने का कार्य प्रारंभ हो जाता हैं। विश्वास ने बताया कि कश्मीर को महानगर में उतारने के लिए 135-140 कमर्चारी दिन-रात काम कर रहे है और उम्मीद है कि 26 सिंतबर (महालया) तक पंडाल निर्माण का काम पूरा हो जाएगा। उन्होंने बताया कि कश्मीर का रंग जमाने के लिए सिंकारा (नाव) के साथ ही वहां की लोक कला संस्कृति को भी प्रस्तुत करने की कोशिश की जा रही है।
वहीं, पूर्वाचल शक्ति संघ की ओर से आयोजित दुर्गापूजा की तैयारियां जोर शोर से जारी है। पंडाल निर्माण में लगे कारीगर थीम में जीवंतता लाने के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं। संघ के एक वरिष्ठ सदस्य ने बताया कि मुताबिक इस बार उनकी थीम सपना है। उन्होंने बताया कि कठोर परिस्थितियों के बावजूद भी लोगों के मरे नहीं है। हर व्यक्ति उन्हें पूरा करने की कोशिश करता है। एक अन्य सदस्य नेव बताया कि एसएन मुखर्जी की देखरेखमें करीब 25 कारीगर थीम में जान डालने के लिए तल्लीन है। उन्होंने बताया कि पंडाल निर्माण छह लाख रुपए की लागत आएगी, जबकि बिजली सज्जा पर तीन लाख खर्च किया जाएगा। पूजा कमिटी के एक सदस्य ने बताया कि बीते साल पूर्वाचल शक्ति संघ ने दुर्गापूजा की थीम को बच्चों पर भी आधारित किया था। इसके तहत कविगुरू रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा बच्चों के लिए लिखे गए सहज पाठ के विभिन्न पृष्ठों को पूजा पंडाल में प्रस्तुत किया गया था।
दूसरी ओर, ज्यों-ज्यों दुर्गापूजा के दिन नजदीक आ रहे हैं, त्यों-त्यों मूर्तिकारों की व्यस्तता बढ़ गई है। मूर्तिकारों के मुताबिक अब उनके पास बिल्कुल फुसर्त नहीं है। विभिन्न पूजा कमिटियों का दवाब बढ़ रहा है और सभी चाहते हैं कि महालया (26 सितंबर) तक मूर्तियां उनके पंडाल में पहुंच जाए। रुद्र पाल नामक एक मूर्तिकार ने बताया कि दिक्कत तब आती है, जब सभी पूजा कमिटियां वाले यहीं कहते हैं कि उनक् पंडाल में मूर्ति महालया के ही दिन पहुंचे। महालया से एक दिन पहले या बाद में प्रतिमा पंडाल में पहुंचाने पर वे नाराज हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि मूर्तियां पंडाल में पहुंचने के बाद भी उनका कुछ काम बाकी रह जाता है, जिसे हमें पंडाल में जाकर पूरा करना पड़ता है।
Wednesday, September 7, 2011
विवादों में विश्वभारती
शंकर जालान
कविगुरू रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा स्थापित किए गए शांतिनिकेतन विश्वविद्यालय से लगता है विवादों का नाता गहरा हो गया है। पिछले साल गुरुदेव की 150वीं जयंती का समारोह शुरू होने के कुछ दिनों बाद ही तत्कालीन उपकुलपति रजतकांत राय को भ्रष्टाचार के कारण हटाने पर आंदोलन तेज होने लगा। राय के रिटायर होने के बाद उनके पद की जिम्मेदारी संभाल रहे कार्यवाहक उपकुलपति उदयनारायण सिंह भी अब विवाद में घिर गए हैं। हाल में अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान टैगोर की करीब 1500 मूल पेंटिंग्स की कापियां ले जाकर वे विवादों में घिर चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक उन्होंने अपने इस कार्य की जानकारी केन्द्रीय संस्कृति मंत्रालय या विश्वविद्यालय के किसी वरिष्ठ अधिकारी को देने की जरूरत तक महसूस नहीं की। रवीन्द्र भवन के विशेष अधिकारी नीलांजन बनर्जी ने सिंह को पत्र लिख कर उन पर यह सीधा आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया है कि टैगोर की जिन पेंटिंग्स की कापियां वे अपने साथ ले गए थे उसकी फीस भी उन्होंने नहीं अदा की। यह फीस 15 लाख के आसपास है। वहीं कार्यवाहक उपकुलपति सिंह ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों का खंडन किया है। उन्होंने कहा कि तस्वीरों की सीडी ले जाने के पीछे उनका काई व्यवसायिक मकसद नहीं था बल्कि वे टैगोर की कलाकृतियों को विदेशों में शो केस करना चाहते थे।
इसी बीच विश्वविद्यालय के पूर्व उपकुलपित रजतकांत राय ने भी सिंह के कदम को आपत्तिजनक कहा है। सूत्रों ने दावा किया है कि कार्यवाहक उपकुलपति उदयनारायण सिंह के अमेरिका यात्रा की जानकारी केन्द्रीय संस्कृति मंत्रालय को नहीं थी।
मालूम हो कि मैथिली और बांग्ला के विद्वान उदयनारायण सिंह विश्वभारती विश्वविद्यालय से पूर्व राज्यपाल गोपालकृष्ण गांधी के आग्रह पर जुड़े थे।
कविगुरू रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा स्थापित किए गए शांतिनिकेतन विश्वविद्यालय से लगता है विवादों का नाता गहरा हो गया है। पिछले साल गुरुदेव की 150वीं जयंती का समारोह शुरू होने के कुछ दिनों बाद ही तत्कालीन उपकुलपति रजतकांत राय को भ्रष्टाचार के कारण हटाने पर आंदोलन तेज होने लगा। राय के रिटायर होने के बाद उनके पद की जिम्मेदारी संभाल रहे कार्यवाहक उपकुलपति उदयनारायण सिंह भी अब विवाद में घिर गए हैं। हाल में अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान टैगोर की करीब 1500 मूल पेंटिंग्स की कापियां ले जाकर वे विवादों में घिर चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक उन्होंने अपने इस कार्य की जानकारी केन्द्रीय संस्कृति मंत्रालय या विश्वविद्यालय के किसी वरिष्ठ अधिकारी को देने की जरूरत तक महसूस नहीं की। रवीन्द्र भवन के विशेष अधिकारी नीलांजन बनर्जी ने सिंह को पत्र लिख कर उन पर यह सीधा आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया है कि टैगोर की जिन पेंटिंग्स की कापियां वे अपने साथ ले गए थे उसकी फीस भी उन्होंने नहीं अदा की। यह फीस 15 लाख के आसपास है। वहीं कार्यवाहक उपकुलपति सिंह ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों का खंडन किया है। उन्होंने कहा कि तस्वीरों की सीडी ले जाने के पीछे उनका काई व्यवसायिक मकसद नहीं था बल्कि वे टैगोर की कलाकृतियों को विदेशों में शो केस करना चाहते थे।
इसी बीच विश्वविद्यालय के पूर्व उपकुलपित रजतकांत राय ने भी सिंह के कदम को आपत्तिजनक कहा है। सूत्रों ने दावा किया है कि कार्यवाहक उपकुलपति उदयनारायण सिंह के अमेरिका यात्रा की जानकारी केन्द्रीय संस्कृति मंत्रालय को नहीं थी।
मालूम हो कि मैथिली और बांग्ला के विद्वान उदयनारायण सिंह विश्वभारती विश्वविद्यालय से पूर्व राज्यपाल गोपालकृष्ण गांधी के आग्रह पर जुड़े थे।
केंद्र हारा, किसान जीते
शंकर जालान
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी की सहमति से राज्य के बिजली मंत्री मनीष गुप्ता ने पूर्व मेदिनीपुर जिले के हरिपुर में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा केंद्र परियोजना को रद्द कर दिया है। ममता बनर्जी की इस घोषणा से केंद्र (केंद्रीय सरकार) जहां खुद को हारा हुआ महसूस कर रहा है। वहीं, जिले के किसान जीत का जश्न मना रहे हैं। मुख्यमंत्री बनर्जी की इस घोषणा के ठीक चार दिन बाद बंगाल के दौर पर आए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने परमाणु ऊर्जा की अहमियत और जरूरतों पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को संकेत दिया कि पूर्व मेदिनीपुर के हरिपुर में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा केंद्र परियोजना को निरस्त कर उन्होंने अच्छा नहीं किया है। हालांकि इस संबंध में उन्होंने कुछ भी नहीं कहा पर उपयोगिता बता कर सब कुछ कह गए। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि देश के विकास में परमाणु ऊर्जा की महत्वपूर्ण भूमिका है। यह भूमिका भविष्य में और महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने कहा कि परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में कई अनुसंधान हो रहे हैं। केंद्रीय वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी, राज्यपाल एमके नारायणन के साथ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मंच पर मौजूदगी के बीच उन्होंने परमाणु ऊर्जा के संबंध में जो कुछ भी कहा उनसे साफ लग रहा था कि वे परमाणु बिजली केंद्र स्थापित करने को लेकर काफी आशान्वित हैं। ध्यान रहे कि प्रधानमंत्री के दौरे से मात्र चार दिन पहले विधानसभा में बिजली मंत्री मनीष गुप्ता ने घोषणा की थी कि राज्य में अब परमाणु बिजली परियोजना स्थापित नहीं होगा।
मालूम हो कि प्रधानमंत्री ने अपने रूस दौरे के दौरान देश में पांच परमाणु बिजली संयंत्र स्थापित करने के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। उसी में से एक पूर्व मेदिनीपुर के हरिपुर में स्थापित होना था। पर्यावरण मंत्रालय ने भी
संयत्र स्थापित करने के हरी झंडी दे दी थी। रूस की एक कंपनी को जमीन भी आवंटित कर दी गई थी। बावजूद इसके केंद्र सरकार को बिना विश्वास में लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने परमाणु बिजली परियोजना रद्द करने की घोषणा की तो केंद्र सरकार के लिए एक परेशानी खड़ी हो गई है।
वहीं राजनीतिक हलकों में दबे स्वर में यह बात उठने लगी है कि इस मसले पर शायद राज्य व केंद्र आमने-सामने हो सकते हैं।
दूसरी ओर, वैज्ञानिकों ने पूर्व मेदिनीपुर जिले के हरिपुर में परमाणु ऊर्जा परियोजना को रद्द करने के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के फैसले का स्वागत करते हुए उन्हें धन्यवाद दिया है।परमाणु विद्युत विरोधी प्रचार आंदोलन के बैनर तले
वैज्ञानिकों ने कहा कि हम बंगाल सरकार को समझदारी दिखाने के लिए धन्यवाद देते हैं और राष्ट्र के समक्ष उदाहरण पेश करने के लिए बधाई देते हैं। उन्होंने कहा कि हमे उम्मीद है कि केंद्र भी ऐस इस बाबत समझदारी दिखाएगा।
उन्होंने कहा कि वे लगातार इस बात की मांग करते रहे हैं कि बंगाल को परमाणु मुक्त क्षेत्र घोषित किया जाए। इस बयान पर साहा परमाणु भौतिकी संस्थान के पलाशबरन पाल, भारतीय रासायनिक जीवविज्ञान संस्थान के तुषार
चक्रवर्ती, बोस संस्थान के पूर्व निदेशक मेहर इंजीनियर, बिरला औद्योगिक एवं प्रौद्योगिकी संग्रहालय के पूर्व निदेशक समर बागची, स्कूल ऑफ इनर्जी स्टडीज के पूर्व निदेशक सुजाय बसु तथा साहा परमाणु भौतिकी संस्थान के
पूर्व निदेशक मनोज पाल समेत कई वैज्ञानिकों ने हस्ताक्षर किए हैं।
राज्य सरकार के इस फैसला का वैज्ञानिकों द्वारा स्वागत किए जाने पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्ववाली पश्चिम
बंगाल सरकार ने और स्पष्ट कर दिया है कि पूर्वी मेदिनीपुर जिले के हरिपुर में कतई प्रस्तावित परमाणु बिजली संयंत्र नहीं लगेगा। इतना ही नहीं बंगाल में अब एक भी परमाणु उर्जा केंद्र नहीं स्थापित होंगे। विधानसभा में पूछे गये सवालों के जवाब में ऊर्जा मंत्री मनीष गुप्ता ने कहा कि राज्य सरकार हरिपुर में परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित नहीं करने का निर्णय लिया है। रा्ज्य के पूर्व मुख्य सचिव रहे गुप्ता ने आरोप लगाया कि पूर्व वाममोर्चा सरकार ने परियोजना के बारे में लोगों को गुमराह किया था। तृणमूल कांग्रेस की अगुवाई वाली वर्तमान सरकार राज्य के किसी भी क्षेत्र में परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना के पक्ष में नहीं है।
यह पूछे जाने पर कि बिजली की बढ़ती मांग और कमी को सरकार कैसे पूरा करेगी ? इस पर गुप्ता ने कहा कि राज्य में वर्तमान समय में 6500 मेगावाट बिजली की मांग है। इनमें से 5,525 मेगावाट बिजली राज्य में उत्पन्न की जा रही
है, जबकि कमी को पूरा करने के लिए पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड से बिजली खरीदी जाएगी।
उन्होंने कहा कि स्थानीय किसानों और मछुआरों ने आजीविका से बेदखली और जानमाल के नुकसान के भय से कई गैर सरकारी संगठनों परमाणु ऊर्जा केंद्र पर आपत्ति जताई थी। साथ ही वाममोर्चा सरकार ने इस परियोजना के बारे में
लोगों को भ्रमित किया था।
केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने इस परियोजना को मंजूरी देने के साथ-साथ रूस की कंपनी रोसाटोम को हरीपुर में
जमीन का आबंटन भी कर दिया था। परियोजना के तहत कंपनी को हरीपुर में एक परमाणु पार्क की स्थापना करना था, जहां एक हजार मेगावाट परमाणु बिजली का उत्पादन होता। बाद में कई गैरसरकारी संस्थाओं (एनजीओ) के समर्थन में स्थानीय किसानों व मछुआरों ने इस परियोजना के खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिया था। उनका कहना था कि परियोजना स्थापित होने से उनकी आजीविका खत्म होने के साथ-साथ उनके विस्थापित होने की आशंका है। यही नहीं, कुछ पर्यावरणविदों व वैज्ञानिकों ने भी परियोजना से पर्यावरण पर होने वाले खतरे के प्रति चिंता जताई थी।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी की सहमति से राज्य के बिजली मंत्री मनीष गुप्ता ने पूर्व मेदिनीपुर जिले के हरिपुर में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा केंद्र परियोजना को रद्द कर दिया है। ममता बनर्जी की इस घोषणा से केंद्र (केंद्रीय सरकार) जहां खुद को हारा हुआ महसूस कर रहा है। वहीं, जिले के किसान जीत का जश्न मना रहे हैं। मुख्यमंत्री बनर्जी की इस घोषणा के ठीक चार दिन बाद बंगाल के दौर पर आए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने परमाणु ऊर्जा की अहमियत और जरूरतों पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को संकेत दिया कि पूर्व मेदिनीपुर के हरिपुर में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा केंद्र परियोजना को निरस्त कर उन्होंने अच्छा नहीं किया है। हालांकि इस संबंध में उन्होंने कुछ भी नहीं कहा पर उपयोगिता बता कर सब कुछ कह गए। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि देश के विकास में परमाणु ऊर्जा की महत्वपूर्ण भूमिका है। यह भूमिका भविष्य में और महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने कहा कि परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में कई अनुसंधान हो रहे हैं। केंद्रीय वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी, राज्यपाल एमके नारायणन के साथ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मंच पर मौजूदगी के बीच उन्होंने परमाणु ऊर्जा के संबंध में जो कुछ भी कहा उनसे साफ लग रहा था कि वे परमाणु बिजली केंद्र स्थापित करने को लेकर काफी आशान्वित हैं। ध्यान रहे कि प्रधानमंत्री के दौरे से मात्र चार दिन पहले विधानसभा में बिजली मंत्री मनीष गुप्ता ने घोषणा की थी कि राज्य में अब परमाणु बिजली परियोजना स्थापित नहीं होगा।
मालूम हो कि प्रधानमंत्री ने अपने रूस दौरे के दौरान देश में पांच परमाणु बिजली संयंत्र स्थापित करने के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। उसी में से एक पूर्व मेदिनीपुर के हरिपुर में स्थापित होना था। पर्यावरण मंत्रालय ने भी
संयत्र स्थापित करने के हरी झंडी दे दी थी। रूस की एक कंपनी को जमीन भी आवंटित कर दी गई थी। बावजूद इसके केंद्र सरकार को बिना विश्वास में लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने परमाणु बिजली परियोजना रद्द करने की घोषणा की तो केंद्र सरकार के लिए एक परेशानी खड़ी हो गई है।
वहीं राजनीतिक हलकों में दबे स्वर में यह बात उठने लगी है कि इस मसले पर शायद राज्य व केंद्र आमने-सामने हो सकते हैं।
दूसरी ओर, वैज्ञानिकों ने पूर्व मेदिनीपुर जिले के हरिपुर में परमाणु ऊर्जा परियोजना को रद्द करने के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के फैसले का स्वागत करते हुए उन्हें धन्यवाद दिया है।परमाणु विद्युत विरोधी प्रचार आंदोलन के बैनर तले
वैज्ञानिकों ने कहा कि हम बंगाल सरकार को समझदारी दिखाने के लिए धन्यवाद देते हैं और राष्ट्र के समक्ष उदाहरण पेश करने के लिए बधाई देते हैं। उन्होंने कहा कि हमे उम्मीद है कि केंद्र भी ऐस इस बाबत समझदारी दिखाएगा।
उन्होंने कहा कि वे लगातार इस बात की मांग करते रहे हैं कि बंगाल को परमाणु मुक्त क्षेत्र घोषित किया जाए। इस बयान पर साहा परमाणु भौतिकी संस्थान के पलाशबरन पाल, भारतीय रासायनिक जीवविज्ञान संस्थान के तुषार
चक्रवर्ती, बोस संस्थान के पूर्व निदेशक मेहर इंजीनियर, बिरला औद्योगिक एवं प्रौद्योगिकी संग्रहालय के पूर्व निदेशक समर बागची, स्कूल ऑफ इनर्जी स्टडीज के पूर्व निदेशक सुजाय बसु तथा साहा परमाणु भौतिकी संस्थान के
पूर्व निदेशक मनोज पाल समेत कई वैज्ञानिकों ने हस्ताक्षर किए हैं।
राज्य सरकार के इस फैसला का वैज्ञानिकों द्वारा स्वागत किए जाने पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्ववाली पश्चिम
बंगाल सरकार ने और स्पष्ट कर दिया है कि पूर्वी मेदिनीपुर जिले के हरिपुर में कतई प्रस्तावित परमाणु बिजली संयंत्र नहीं लगेगा। इतना ही नहीं बंगाल में अब एक भी परमाणु उर्जा केंद्र नहीं स्थापित होंगे। विधानसभा में पूछे गये सवालों के जवाब में ऊर्जा मंत्री मनीष गुप्ता ने कहा कि राज्य सरकार हरिपुर में परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित नहीं करने का निर्णय लिया है। रा्ज्य के पूर्व मुख्य सचिव रहे गुप्ता ने आरोप लगाया कि पूर्व वाममोर्चा सरकार ने परियोजना के बारे में लोगों को गुमराह किया था। तृणमूल कांग्रेस की अगुवाई वाली वर्तमान सरकार राज्य के किसी भी क्षेत्र में परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना के पक्ष में नहीं है।
यह पूछे जाने पर कि बिजली की बढ़ती मांग और कमी को सरकार कैसे पूरा करेगी ? इस पर गुप्ता ने कहा कि राज्य में वर्तमान समय में 6500 मेगावाट बिजली की मांग है। इनमें से 5,525 मेगावाट बिजली राज्य में उत्पन्न की जा रही
है, जबकि कमी को पूरा करने के लिए पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड से बिजली खरीदी जाएगी।
उन्होंने कहा कि स्थानीय किसानों और मछुआरों ने आजीविका से बेदखली और जानमाल के नुकसान के भय से कई गैर सरकारी संगठनों परमाणु ऊर्जा केंद्र पर आपत्ति जताई थी। साथ ही वाममोर्चा सरकार ने इस परियोजना के बारे में
लोगों को भ्रमित किया था।
केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने इस परियोजना को मंजूरी देने के साथ-साथ रूस की कंपनी रोसाटोम को हरीपुर में
जमीन का आबंटन भी कर दिया था। परियोजना के तहत कंपनी को हरीपुर में एक परमाणु पार्क की स्थापना करना था, जहां एक हजार मेगावाट परमाणु बिजली का उत्पादन होता। बाद में कई गैरसरकारी संस्थाओं (एनजीओ) के समर्थन में स्थानीय किसानों व मछुआरों ने इस परियोजना के खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिया था। उनका कहना था कि परियोजना स्थापित होने से उनकी आजीविका खत्म होने के साथ-साथ उनके विस्थापित होने की आशंका है। यही नहीं, कुछ पर्यावरणविदों व वैज्ञानिकों ने भी परियोजना से पर्यावरण पर होने वाले खतरे के प्रति चिंता जताई थी।
Friday, August 26, 2011
जहां १८ अगस्त को मना स्वाधीनता दिवस
शंकर जालान
जहां पूरा देश पंद्रह अगस्त को ६५वां स्वतंत्रता दिवस मनाया वहीं इसके तीन दिन बाद दक्षिण दिनाजपुर िजले बालुरघाट के निवासियों ने १८ अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाया। दरअसल वर्तमान दक्षिण दिनाजपुर जिले के बालुरघाट सहित कई इलाके 18 अगस्त 1947 को स्वतंत्र हुए थे। 15 अगस्त 1947 को देश ब्रिटिश शासन से मुक्त हुआ, लेकिन बालुरघाट सहित पश्चिम बंगाल के कई इलाके 17 अगस्त 1947 तक पाकिस्तान के अंतर्गत थे। तत्कालीन हिन्दु महासभा के अध्यक्ष व जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने कड़ी लड़ाई लड़ कर 18 अगस्त 1947 को बालुरघाट पाकिस्तान से मुक्त कराकर भारत में शामिल किया। इसी दिन को याद करते हुए १८ अगस्त को भाजपा के तत्वावधान में तिरंगा फहरा कर बालुरघाट में स्वतंत्रता दिवस मनाया गया। भाजपा के राज्य सचिव देवश्री चौधरी ने बताया कि देश की आजादी के लिए किए गए आंदोलनों में बालुरघाट शहर की बड़ी भूमिका थी। 1942 में भारत छोड़ा आंदोलन में बालुरघाटवासी शामिल हुए थे। उसी वर्ष 14 सितंबर को तत्कालीन दिनाजपुर जिले के महकमा कार्यालय का दस हजार लोगों ने घेराव किया था। इनलोगों ने ट्रेजरी भवन में आग भी लगाई थी। स्वतंत्रता सेनानियों ने इस दिन बालुरघाट शहर के कुल 16 सरकारी कार्यालय को तहस-नहस कर दिया। एसडीओ कार्यालय के सामने से ब्रिटिश झंडा यूनियन जैक को उतारकर तिरंगा लगा दिया था। दस हजार स्वतंत्रता सेनानियों की डर से शहर की पुलिस फरार हो गई थी। उस समय कुल ढाई दिनों तक बालुरघाट ब्रिटिश से मुक्त रहा। इस घटना की याद में तत्कालीन एसडीओ कार्यालय के सामने सरकार ने एक स्मारक स्तंभ का निर्माण कराया। चौधरी के मुताबिक बालुरघाट सीमा से सटे डांगी गांव में 1942 के 14 सितंबर को स्वतंत्रता सेनानी एकत्रित होकर बालुरघाट के लिए रवाना हुए। जिस स्थान से रवाना हुए थे वहां भी एक स्मारक स्तंभ है, लेकिन सरकारी उदासीनता के कारण यह स्मारक स्तंभ नष्ट होने की कगार पर है। सरकारी तौर पर यहां 14 सितंबर या 18 अगस्त मनाया नहीं जाता है, इसलिए पार्टी (भाजपा) की ओर डांगी में शहीद स्तंभ की साफ-सफाई कर फूल माला चढ़ाकर स्वतंत्रता सेनानियों का सम्मानित करते हुए पदयात्रा की जाती है। इसके बाद तिरंगा फहराया जाता है। इस बार भी ऐसा ही किया गया। उन्होंने बताया कि जिन्ना की साजिश से देश बंटा। उस समय हिन्दु व मुस्लिम बहुलता को लेकर दोनों देशों की जमीन के बंटवारे के लिए मोहम्मद जिन्ना ने आवाज उठाई। ब्रिटिश ने इस बंटवारे के लिए बाउंडरी कमीशन तैयार किया। जिसका नेतृत्व दिया सिरील रेडक्लिफ। उन्होंने बालुरघाट सहित बंगाल के कई इलाके पाकिस्तान को दे दिए इसके विरोध में हिन्दु सभा के मुखर्जी ने जमकर विरोध किया। उन्होंने रेडक्लिफ को समाझाया कि बालुरघाट, माला व मुर्शिदाबाद के जिन इलाकों को पाकिस्तान के अधीन किया गया है वे हिंदू बहुल इलाके है। डा. श्यामाप्रसाद की लड़ाई के बाद बालुरघाट सहित बाकी इलाका 1947 के 18 अगस्त को भारत में शामिल हुए। इसलिए १८ अगस्त को यह स्वतंत्रता दिवस मनाया गया।
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